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इंदौर-भोपाल सहित 30 शहरों के मास्टर प्लान अधर में, आवासीय भूखंडों पर धड़ल्ले से व्यावसायिक निर्माणों के खिलाफ मचा हल्ला, सीलिंग कार्रवाई की मांग शुरू

September 09, 2026

 

प्राधिकरण, हाउसिंग बोर्ड के साथ गृह निर्माण संस्थाओं के हजारों भूखंडों पर होटल-हॉस्पिटल से लेकर तमाम व्यावसायिक गतिविधियां संचालित, निगम अभी सिर्फ बेसमेंट कर रहा है सील, वकील ने नोटिस भी थमाया

इंदौर। अभी भोपाल (Bhopal) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देश पर सीलिंग (Sealing) की कार्रवाई चल रही है और अरेरा कॉलोनी सहित आवासीय भूखंडों पर स्थित व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को नगर निगम सील कर रहा है। अब इसी तरह की कार्रवाई की मांग इंदौर में भी उठने लगी है। भोपाल से ज्यादा अवैध निर्माण, अतिक्रमण औद्योगिक राजधानी इंदौर में मौजूद है। बीते 5 सालों से इंदौर का मास्टर प्लान अधर में है, तो भोपाल के मास्टर प्लान को तो 20 साल से अधिक समय हो गया। इंदौर-भोपाल के साथ-साथ 30 शहर ऐसे हैं जहां अभी भी पुराने मास्टर प्लान के मुताबिक ही नक्शे मंजूर हो रहे हैं। भोपाल में सीलिंग का हल्ला मचने के बाद इंदौर के मास्टर प्लान को लागू करने की चर्चा भी शुरू हुई, तो वरिष्ठ वकील ने कानूनी नोटिस भी जारी किया।


  • हाईकोर्ट अधिवक्ता अजय कुमार आसुदानी ने मुख्य सचिव सहित कलेक्टर और निगमायुक्त को कानूनी नोटिस भेजा है। श्री आसुदानी ने अग्रिबाण से चर्चा करते हुए कहा कि इंदौर में आवासीय क्षेत्रों में धड़ल्ले से व्यवसायिक गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही है। अभी सुप्रीम कोर्ट ने 25 मार्च को स्पष्ट आदेश दिए कि आवासीय क्षेत्रों में व्यवसायिक गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकती और इसी के चलते सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावी कार्रवाई के साथ हलफनामा भी मांगा है। इसके चलते भोपाल निगम ने कई परिसरों को सील भी कर दिया। इसी तरह की कार्रवाई अब इंदौर में भी आवश्यक है। श्री आसुदानी ने साकेत नगर का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यहां पर व्यवसायिक गतिविधियों की बाढ़ आ गई है। साकेत, गुलमोहर क्षेत्र में जिम के साथ-साथ रेस्टोरेंट, कैफे, राजहंस दाल-बाफले, मिस्टर बिन्स सहित तमाम गतिविधियों के चलते स्थानीय रहवासियों का रहना मुश्किल हो गया है। स्कूल, हॉस्पिटल और अन्य गतिविधियां भी इसी तरह संचालित है। जबकि इंदौर के मास्टर प्लान के साथ-साथ नगर नियोजन और निगम कानूनों में आवासीय क्षेत्र में इस तरह की व्यवसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है। मगर स्थानीय अधिकारियों, इंजीनियरों, बिल्डरों और रसूखदारों की मिलीभगत के चलते ये गतिविधियां धड़ल्ले से चल रही है, जिसके चलते इन पर रोक लगाई जाना चाहिए और इस कानूनी नोटिस में 15 दिन में कार्रवाई की मांग भी की गई। अन्यथा सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दायर कर न्यायालय निर्देशों के अनुपालन की मांग की जाएगी। साकेत में तो व्यवसायिक निर्माण हो ही रहे हैं, दूसरी तरफ पूरे इंदौर शहर की भी यही स्थिति है। बॉम्बे हॉस्पिटल के सामने महालक्ष्मी नगर मैन रोड और निपानिया रोड पर भी तमाम आवासीय भूखंडों पर 100 प्रतिशत व्यवसायिक अवैध निर्माण हो चुके हैं और नगर निगम के इंजीनियर आंख मूंदे बैठे हैं। एक-दो बार छुटपुट कार्रवाई की गई और कुछ समय पूर्व होटलों-होस्टलों को सील भी किया गया। मगर जनप्रतिनिधियों के दबाव-प्रभाव के चलते फिर से ये संचालित होने लगे। अभी तो हालत यह है कि तुलसी नगर, महालक्ष्मी नगर की छोटी-छोटी अंदरुनी सडक़ों, गलियों में आवासीय भूखंडों पर धड़ल्ले से दुकानें तन रही है। इंदौर विकास प्राधिकरण में योजना 54, 74, 78 सहित अन्य आवासीय भूखंडों पर इसी तरह स्कूल, होटल, हॉस्पिटल सहित तमाम व्यवसायिक गतिविधियां शुरू हो गई, तो यही हाल हाउसिंग बोर्ड के आवासीय भूखंडों के मकानों के साथ-साथ गृह निर्माण संस्थाओं द्वारा आबंटित भूखंडों का भी व्यवसायिक उपयोग हो रहा है। योजना 171 में पुष्प विहार के ही रोड से लगे भूखंडों पर व्यवसायिक दुकानें, चाट-चौपाटी शुरू हो गई है।

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