
नई दिल्ली ।72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह (National Film Awards Ceremony) इस बार दिल्ली के बजाय गुजरात के केवड़िया में आयोजित किया जाएगा। समारोह का स्थान बदले जाने को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने केंद्र सरकार (Central Government) के फैसले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गुजरात (Gujarat) और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक दीवार खड़ी करने की कोशिश की जा रही है। पार्टी सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कलाकारों से समारोह का बहिष्कार (Boycott) करने की अपील की है।
मुंबई में मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उद्धव ठाकरे ने सवाल किया कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जैसे कार्यक्रम मुंबई, कोलकाता, बंगलूरू और दूसरे राज्यों की राजधानियों में क्यों नहीं आयोजित किए जा सकते। उन्होंने कहा कि गुजरात और देश के बाकी हिस्सों के बीच दीवार बनाने की कोशिश क्यों की जा रही है, इसका जवाब भारतीय जनता पार्टी से मांगा जाना चाहिए।
उद्धव ठाकरे की आपत्ति समारोह के आयोजन स्थल को दिल्ली से गुजरात स्थानांतरित किए जाने को लेकर है। उन्होंने इस फैसले के पीछे की वजह पर सवाल उठाते हुए इसे देश के विभिन्न हिस्सों के बीच दूरी पैदा करने की कोशिश के तौर पर पेश किया।
इसी मुद्दे पर शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल गुजरात के प्रधानमंत्री हैं। राउत ने कहा कि यह राष्ट्रीय कार्यक्रम है और इसलिए लोगों को उम्मीद होगी कि इसका आयोजन देश की राजधानी में हो। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या यह वाइब्रेंट गुजरात का कार्यक्रम है। इस फैसले के पीछे के लोगों के लिए उन्होंने ‘दिमागी नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किया।
राउत ने समारोह के स्थान में बदलाव को लेकर एक और दावा किया। उन्होंने कहा कि गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले पुरस्कार समारोह की जगह बदली जा रही है। उनका आरोप था कि इस बदलाव से देश की राजधानी और राष्ट्रीय पुरस्कार की अहमियत कम की जा रही है। उन्होंने कलाकारों से गुजरात नहीं जाने की अपील करते हुए कहा कि देश पर गर्व करने वाले कलाकार पुरस्कार लेने से इनकार कर दें।
अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह अब दिल्ली के बजाय गुजरात के केवड़िया में आयोजित होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर को पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित करेंगी। समारोह के स्थान में बदलाव के कारण यह आयोजन राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
केवड़िया का नाम अब एकता नगर रखा गया है। यहां सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा स्थित है, जिसे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी कहा जाता है। इसकी ऊंचाई 597 फीट है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में इसका उद्घाटन किया था।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत 1954 में हुई थी। पहला समारोह दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया गया था। इसके बाद ज्यादातर समारोह विज्ञान भवन में ही हुए। हालांकि, कुछ अवसरों पर आयोजन दिल्ली से बाहर भी हुआ है। 1971 में 17वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह चेन्नई में आयोजित किया गया था। इस बार 72वें समारोह के लिए गुजरात के केवड़िया को स्थान बनाया गया है, जिस पर उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने सवाल उठाए हैं।