
इंदौरी व्यापारी कल मनाएंगे नो यूपीआई डे, ठेले से लेकर शॉपिंग मॉल तक विरोध
केन्द्रद्वारा थोपे एमडीआर शुल्क का हो रहा है तीखा विरोध
इंदौर। केन्द्र सरकार (Central Government) द्वारा 15 अक्टूबर से थोपे जाने वाले 0.4 फीसदी एमडीआर (MDR) को लेकर देशभर में हल्ला मचा है। पहले तो केन्द्र सरकार ने डिजिटल भुगतान (Digital payments) को बढ़ावा दिया और अब 2 हजार रुपए से अधिक की राशि पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट आरोपित कर डाला, जिसके चलते ठेले से लेकर शॉपिंग मॉल तक के छोटे-बड़े व्यापारी विरोध में उतर आए और इंदौर के ही 125 से ज्यादा व्यापारिक संगठनों ने कल नो यूपीआई डे (‘No UPI Day’) मनाना तय किया और इस दौरान किसी भी तरह का डिजिटल भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा। जितने भी क्यूआर कोड और साउंड बॉक्स हैं, वे सब काउंटरों से हटा दिए जाएंगे। यानी सिर्फ नकद में ही लेन-देन होगा।
कोरोना के बाद से डिजिटल भुगतान में तेजी आई और स्थिति यह हुई कि सामान्य फुटपाथी या ठेले-गुमटी के जरिए सामान बेचने वाले अदने से कारोबारी ने भी यूपीआई के जरिए डिजिटल भुगतान लेना शुरू कर दिया। समय-समय पर केन्द्र सरकार आंकड़े जारी कर डिजिटल इंडिया का ढोल भी पीटती रही कि अब नकदी की बजाय ऑनलाइन भुगतान बढ़ रहा है। दूसरी तरफ केन्द्र ने 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वसूलने का निर्णय लिया और इसे 15 अक्टूबर से पूरे देश में लागू करने की घोषणा की, जिसमें 2 हजार से अधिक के ऑनलाइन भुगतान पर यह राशि व्यापारी को ही चुकाना पड़ेगी। नतीजतन इस निर्णय का विरोध इंदौर सहित देशभर में शुरू हो गया। अहिल्या चैम्बर ऑफ कॉमर्स, इंदौर रिटेल एसोसिएशन, सियागंज व्यापारी, जेल रोड से लेकर शहरभर के सवा सौ से अधिक छोटे-बड़े संगठनों ने कल 23 सितम्बर को नो यूपीआई डे मनाने का निर्णय लिया, जिसके चलते ठेले से लेकर शॉपिंग मॉल सहित तमाम प्रतिष्ठानों पर जो डिजिटल भुगतान के लिए क्यूआर कोड और साउंड बॉक्स रखे रहते हैं उन्हें हटा दिया जाएगा। यानी किसी भी तरह का डिजिटल भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे। व्यापारियों का कहना है कि अंतत: इसका बोझ भी उपभोक्ताओं पर ही आएगा।
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