
स्टिनोसिस में दो हड्डियों के बीच की रीढ़ की हड्डी दबने से दर्द, सुन्नपन और चलने में दिक्कत
इंदौर। लंबे समय तक गलत पॉश्चर (Poor posture) में बैठकर पढ़ाई (studies) करने वाले बच्चों और युवाओं में कमर व रीढ़ (Lower back and spine) से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। डॉक्टरों के मुताबिक बैड (bed) पर बैठकर पढ़ाई करने, लगातार मोबाइल-लैपटॉप इस्तेमाल करने और गलत तरीके से बैठने के कारण रीढ़ पर दबाव बढ़ सकता है। कुछ मामलों में स्लिप डिस्क (slipped disc) जैसी समस्या भी सामने आ रही है।
स्पाइन विशेषज्ञों के अनुसार स्टिनोसिस ऐसी स्थिति है, जिसमें रीढ़ की हड्डियों के बीच का स्थान संकरा होने से नसों पर दबाव पड़ता है। इसके कारण कमर या गर्दन में दर्द, पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन और चलने में परेशानी हो सकती है। इंदौर में एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी के लिए आने वाले मरीजों की संख्या में भी हर साल करीब दोगुनी वृद्धि देखने को मिल रही है। तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और भारती परेशानियों के कारण रीड की हड्डियों की समस्या भी बड़ी है और तेजी से ऑपरेशन सर्जरी की जा रही है इससे आप और आसान बनाने के लिए शहर में 120 से अधिक डॉक्टर मंथन करने जा रहे हैं ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. प्रसाद पाटगाँवकर ने बताया की बेड पर बैठकर पढ़ाई करने वाले बच्चों में भी अब यह समस्या देखी जा रही है स्कूलों में 100 बच्चों में तीन से चार बच्चे इस समस्या की शिकायत कर रहे हैं। 13 से 15 साल तक के बच्चों को भी सर्जरी की जरूरत पड़ रही है क्योंकि खतरनाक है।विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक में 7 से 10 मिलीमीटर के छोटे चीरे से चुनिंदा मरीजों की सर्जरी की जा सकती है। इसमें आसपास के ऊतकों और मांसपेशियों को कम नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जाता है, जिससे कई मरीजों में दर्द और रिकवरी का समय कम हो सकता है। हालांकि हर मरीज के लिए यह तकनीक उपयुक्त नहीं होती।
100 से ज्यादा विशेषज्ञ आएंगे
इंदौर में 25 से 27 सितंबर तक एंडोस्पाइनकॉन कोंपरेन्स होगी । इसमें करीब 31 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी और 100 से अधिक डेलीगेट्स एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की आधुनिक तकनीकों पर चर्चा करेंगे। 27 सितंबर को हैंड्स-ऑन कैडेवरिक वर्कशॉप में सर्जनों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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