
उज्जैन। महाकाल नगरी उज्जैन (City of Mahakal Ujjain) स्थित शाही मस्जिद (Shahi Masjid) इन दिनों खासी चर्चाओं में है। इससे पहले खड़े हनुमान मंदिर (Hanuman Temple) वाला मुद्दा चर्चाओं में था। दरअसल, इन दिनों उज्जैन में ‘सिंहस्थ 2028’ (‘Simhastha 2028’) के तहत सड़क चौड़ीकरण (Road widening) का काम प्रस्तावित है। इसकी ही जद में उज्जैन स्थित खड़े हनुमान मंदिर और शाही मस्जिद (Shahi Masjid) आ रहे हैं। अब मस्जिद के बाहर मुस्लिम समाज से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में एकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। मस्जिद के तोड़फोड़ के मुद्दे पर AIMIM अध्यक्ष एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
ओवैसी ने प्रोटेस्ट को बताया गांधीवादी, सरकार पर बोला हमला
असदुद्दीन ओवैसी ने प्रोटेस्ट कर रहे लोगों के बारे में कहा- “मैं सलाम करता हूं जनता को कि वो लोग गांधीवादी तरीके से प्रोटेस्ट कर रहे हैं।” इसके बाद सरकार पर हमलावर होते हुए कहा- “आप इस तरह से मस्जिदों को शहीद नहीं कर सकते। मैंने संसद में कहा था- वक्फ अमेंडमेंट कानून के जरिए कलेक्टर और सरकार को जो ताकत दी जा रही हैं, उसका मकसद मस्जिदों, दरगाहों, खानकाहों, ईदगाहों को मुसलमानो से छीनना है।”
अलर्ट मोड में प्रशासन, 600 से अधिक जवान तैनात
शाही मस्जिद के बाहर शनिवार रात से लोगों का हुजूम एकट्ठा होना शुरू हो गया था। रविवार दोपहर तक लोगों का विरोध जारी रहा। मुस्लिम समाज के लोग बड़ी संख्या में मस्जिद के अंदर और बाहर एकट्ठे थे। नारेबाजी भी हुई। इसे देखते हुए प्रशासन ने किसी भी हिंसा की संभावना से निपटने के लिए अतिरिक्त फोर्स बुलाया। मस्जिद के सामने बैरिकेड लगाए गए और पुलिस बल व आरएएफ की टुकड़ी तैनात की गई। इसमें करीब 600 से अधिक जवानों को मस्जिद और उसके आस-पास के इलाके में तैनात कर दिया गया है।
636 साल पुरानी शाही मस्जिद पर क्या बोले इमाम
शाही मस्जिद के इमाम मोहम्मद इब्राहिम ने कहा- “प्रशासन से यही कहना है कि धार्मिक स्थल को छोड़कर समाज हर तरह से सहयोग करने के लिए तैयार है। मस्जिद का ढांचा ऐसा है कि अगर थोड़ा भी उससे छेड़छाड़ की गई तो पूरी इमारत नीचे आ सकती है। शहर में इससे पहले भी सड़क चौड़ीकरण हुआ है और धार्मिक स्थलों को छोड़कर चौड़ीकरण किया गया है। उन्होंने दावा किया कि शाही मस्जिद वर्ष 1390 में बनी है और शहर के प्राचीन धार्मिक स्थलों में शामिल है।” मस्जिद के इमाम के मुताबिक, ये मस्जिद करीब 636 साल पुरानी है।
हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी है मुस्लिम पक्ष की याचिका
प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, सिंहस्थ-2028 में उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गोपाल मंदिर मार्ग शहर के व्यस्त और संकरे रास्तों में शामिल है। सिंहस्थ के दौरान यातायात को सुचारू रखने और भीड़ का दबाव कम करने के लिए कंठाल से गोपाल मंदिर तक मार्ग का चौड़ीकरण जरूरी माना जा रहा है।
मुस्लिम समाज पहले इंदौर हाईकोर्ट की एकलपीठ में याचिका लगा चुका है। करीब 17 दिन पहले हाईकोर्ट ने याचिका निरस्त कर दी थी। इधर, प्रशासन धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई में ज्यादा समय देने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि सिंहस्थ की तैयारियों के लिए अब ज्यादा समय नहीं बचा है। रविवार रात या सोमवार सुबह से धार्मिक स्थलों को हटाने की तैयारी की जा रही है।
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