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2047 तक के लिए आएगा इंदौर का मास्टर प्लान, प्लानिंग एरिया यथावत

September 28, 2026

इंदौर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा भोपाल में आवासीय जमीनों पर हुए व्यावसायिक निर्माणों को सील करवाने और मास्टर प्लान के मामले में फटकार लगाने का असर यह हुआ कि अभी दो दिन पहले ताबड़तोड़ शासन ने ड्रॉफ्ट प्लान जारी कर दिया। उसके साथ ही अब इंदौर के लम्बित पड़े मास्टर प्लान को भी जल्द लागू करने की मांग तेज हो गई है। नगर तथा ग्राम निवेश ने पहले 2041 के आधार पर प्लान तैयार किया था। मगर सूत्रों के मुताबिक 3 माह पहले शासन ने निर्देश दिए और उसके चलते 2047 तक के लिए प्लान बनाकर भेजा गया है। भोपाल में भी 2047 तक के लिए ही मास्टर प्लान लाया जा रहा है, उसी तरह इंदौर में भी अब जो नया मास्टर प्लान लागू होगा, वह 2047 तक के लिए रहेगा। हालांकि पिछले 5 साल से इंदौर पुराने यानी 2021 के मास्टर प्लान के मुताबिक ही विकसित हो रहा है।

अभी कुछ समय पूर्व विधानसभा में भी इंदौर-भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस ने हल्ला मचाया था और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने यह तक कहा कि क्या ड्रॉफ्ट बैलगाड़ी से आ रहा है, जिसमें इतनी देरी लग रही है। इसके जवाब में विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का कहना था कि डेढ़ साल पहले ही मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजा जा चुका था। दरअसल, इंदौर और भोपाल के मास्टर प्लान इतनी आसानी से लागू नहीं हो पाते, क्योंकि जमीनी जादूगरों से लेकर सारे नेताओं, कारोबारियों सहित अफसरों का भी हित जुड़ा रहता है। यही कारण है कि भोपाल का मास्टर प्लान 21 साल बाद अब आएगा, तो इंदौर के मास्टर प्लान को भी 5 साल हो चुके हैं। नगर तथा ग्राम निवेश ने 79 गांवों को नए प्लान के मुताबिक प्लानिंग एरिया यानी निवेश क्षेत्र में शामिल कर रखा है।


  • लिहाजा पहले 2041 के मुताबिक तैयारी की गई और उसके बाद 2047 तक के लिए मास्टर प्लान तैयार किया गया, जिसका ड्राफ्ट यानी प्रारुप शासन को नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय द्वारा सौंप दिया है। इसमें प्लानिंग एरिया यथावत ही रखा गया है। लगभग 60 लाख की आबादी के मद्देनजर यह प्लानिंग एरिया बढ़ाया गया और वर्तमान दावों के साथ अब कुल 169 गांव इस प्लानिंग एरिया का हिस्सा रहेंगे। टीडीआर और टीओडी के प्रावधान के साथ-साथ मेट्रो, एक दर्जन से ज्यादा नई सड़कों के अलावा एयरपोर्ट विस्तार सहित अन्य प्रबंध भी आगामी प्लान में किए जाएंगे। चूंकि भोपाल के मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट शासन ने जारी कर दिया है, जिसके चलते अब उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर ठप पड़ी गाड़ी आगे बढ़ सकती है, क्योंकि रियल इस्टेट के तमाम कारोबारी लगातार मास्टर प्लान लागू करने की मांग करते रहे हैं। उसके चलते अवैध निर्माण, अवैध कॉलोनियों सहित अन्य विसंगतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं।

    मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी के कारण भी अब तक रोक रखा प्लान
    मुख्यमंत्री मोहन यादव भी यह स्पष्ट कह चुके हैं कि इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन को अमल में लाया जाएगा और उसके बाद मास्टर प्लान पर काम करेंगे। कुछ समय पूर्व चूंकि मेट्रोपॉलिटन रीजन को भी अंतिम मंजूरी मिली और गजट नोटिफिकेशन भी जारी हो गया, जिसमें इंदौर सहित 6 जिलों की 38 तहसीलों के 2781 गांवों को शामिल करते हुए 16000.88 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को शामिल किया गया है। 75 लाख की आबादी के मान से यह मेट्रोपॉलिटन रीजन बना है। इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर और रतलाम जिलों के कुछ गांवों को इसमें शामिल किया गया है। अब उम्मीद है कि यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिस तरह भोपाल का ड्राफ्ट शासन ने जारी कर दिया उसी तरह अगले कुछ माह में इंदौर का मास्टर प्लान का प्रारुप प्रकाशन भी संभव है, क्योंकि अगले साल निगम और फिर सिंहस्थ सहित विधानसभा चुनाव का हल्ला शुरू हो जाएगा।

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