
भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में नर्सिंग रजिस्ट्रेशन (Nursing Registration) के ऑनलाइन सिस्टम (Online System) का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे. यहां एक गधे के नाम पर नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (Nursing Registration Certificate) जारी हो गया. आवेदन में नाम से लेकर फोटो, माता-पिता की जानकारी और जाति तक सब कुछ फर्जी भरा गया था. इसके बावजूद पोर्टल ने आवेदन को रिजेक्ट नहीं किया, बल्कि कुछ ही मिनटों में सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया।
यह पूरा मामला मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) की ऑनलाइन व्यवस्था से जुड़ा है. NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने इस सिस्टम की जांच के लिए एक टेस्ट आवेदन किया था. उनका मकसद यह पता लगाना था कि नर्सिंग रजिस्ट्रेशन के दौरान आवेदकों की जानकारी और दस्तावेजों की जांच किस तरह होती है. इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन फॉर्म में एक गधे की तस्वीर लगाई और नाम के कॉलम में ‘डंकी’ लिख दिया।
हैरानी की बात यह रही कि इतनी गलत जानकारियां भरने के बाद भी आवेदन स्वीकार हो गया. रवि परमार का दावा है कि ऑनलाइन 2,050 रुपये फीस जमा करने के कुछ ही मिनटों बाद नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया. इस मामले ने ऑनलाइन पोर्टल पर दस्तावेजों की जांच और रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नाम ‘डंकी’, फोटो गधे की, फिर भी मिल गया सर्टिफिकेट
रवि परमार ने अपने टेस्ट आवेदन में आवेदक का नाम ‘डंकी’ दर्ज किया. फोटो के स्थान पर गधे की तस्वीर लगाई गई. पिता के नाम वाले कॉलम में ‘डंकी फादर’, मां के नाम में ‘डंकी मदर’ और जाति के कॉलम में ‘एनिमल’ लिखा गया. इतना ही नहीं, आवेदन में गलत पता भी दर्ज किया गया।
ट्रेनिंग सेंटर की जानकारी में भोपाल नर्सिंग कॉलेज और भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC) का नाम भरा गया. वहीं, 10वीं और 12वीं के अंक और रोल नंबर भी मनमाने तरीके से दर्ज किए गए. इन जानकारियों के बावजूद पोर्टल ने आवेदन को खारिज नहीं किया. फीस जमा होने के कुछ मिनटों के भीतर ही सर्टिफिकेट जारी हो गया।
NSUI ने उठाए दस्तावेजों की जांच पर सवाल
रवि परमार ने कहा कि अगर आधिकारिक पोर्टल पर उनका टेस्ट आवेदन इसी तरह सफल हुआ है, तो यह सिर्फ तकनीकी खामी का मामला नहीं है. इससे नर्सिंग रजिस्ट्रेशन की विश्वसनीयता, दस्तावेजों की जांच और मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं. उनका सवाल है कि जब इस तरह की गलत जानकारी के आधार पर सर्टिफिकेट जारी हो सकता है, तो असली आवेदकों के दस्तावेजों की जांच किस तरह की जा रही है।
NSUI ने इस पूरे मामले में इसकी स्वतंत्र तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराने की मांग की है. संगठन चाहता है कि जांच में यह पता लगाया जाए कि फर्जी जानकारी के बावजूद आवेदन कैसे स्वीकार हुआ और सर्टिफिकेट कैसे जारी किया गया. साथ ही, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है।
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