
नई दिल्ली। छोटे बच्चे का रोना माता पिता के लिए अक्सर चिंता (Frequent anxiety)का कारण बन जाता है। चार महीने के बच्चे को शांत कराना खास तौर पर आसान नहीं होता क्योंकि इस उम्र में बच्चा अपनी जरूरत को शब्दों में नहीं बता सकता। ऐसे में माता पिता उसे गोद में लेकर टहलाते हैं। कोई लोरी सुनाता है तो कोई धीमा संगीत चलाकर उसे शांत करने की कोशिश करता है। लेकिन अमेरिका के (Los Angeles)लॉस एंजिल्स में रहने वाली चीनी मूल की एक महिला ने अपने बच्चे को शांत कराने के लिए जिस तरीके का इस्तेमाल किया है उसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है।
महिला का नाम सारा जेन हो बताया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने बच्चे की दिनचर्या से जुड़ा अनुभव साझा किया है। उनके मुताबिक जब उनका चार महीने का बेटा रोने लगता है तो वह हनुमान चालीसा चला देती हैं। सारा का कहना है कि हनुमान चालीसा सुनते ही बच्चा कुछ ही सेकंड में शांत होने लगता है और करीब दो मिनट में उसकी आंख लग जाती है। इसी अनुभव से जुड़ा वीडियो और पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
इस पूरी कहानी की खास बात यह है कि सारा भारतीय नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वह चीनी मूल की हैं और अमेरिका में रहती हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें हनुमान चालीसा के बारे में अपने भारतीय दोस्तों से जानकारी मिली थी। पहली बार उन्होंने इसे बर्निंग मैन कार्यक्रम के दौरान सुना था। सारा को हनुमान चालीसा की धुन और आवाज शांत महसूस हुई। इसके बाद उन्होंने इसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना लिया।
सारा के मुताबिक बच्चे के रोने पर वह हनुमान चालीसा सुनाने का तरीका अपनाती हैं। उनका व्यक्तिगत अनुभव है कि इसे सुनने के बाद बच्चा तेजी से शांत होता है और कुछ समय में सो जाता है। सोशल मीडिया पर इसी दावे को लेकर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। कई यूजर्स को यह अनुभव बेहद दिलचस्प और प्यारा लगा है।
बच्चे की दिनचर्या में सिर्फ हनुमान चालीसा ही शामिल नहीं है। सारा ने बताया है कि वह बच्चे को ब्रह्मा की लोरी भी सुनाती हैं। इसके अलावा बच्चे को प्राकृतिक माहौल में समय देने जैसी गतिविधियों को भी वह अपनी रूटीन का हिस्सा बताती हैं। उनका मानना है कि बच्चे के लगातार रोने पर उसे अकेला छोड़ने के बजाय उसे शांत करने के अलग अलग तरीके आजमाने चाहिए।
हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि हनुमान चालीसा सुनने के बाद बच्चे के शांत होने की बात सारा का व्यक्तिगत अनुभव है। इसे बच्चों को सुलाने का प्रमाणित वैज्ञानिक या मेडिकल तरीका नहीं माना जा सकता। हर बच्चे की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। वायरल वीडियो की वजह से चर्चा में आई इस कहानी की सबसे दिलचस्प बात यही है कि अमेरिका में रहने वाली एक चीनी मूल की मां ने भारतीय धार्मिक रचना को अपने बच्चे की रोजमर्रा की रूटीन में शामिल किया और उनका यह अनुभव इंटरनेट पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
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