
नई दिल्ली ।कर्नाटक (Karnataka) की शृंगेरी विधानसभा सीट (Sringeri Assembly Seat) पर 2023 में हुई मतगणना (Vote Counting) की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग (Video recording)उपलब्ध नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने भारत निर्वाचन आयोग के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने सवाल उठाया कि चुनाव कराने की जिम्मेदारी निभाने वाली संस्था के पास अपने ही चुनाव से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड क्यों नहीं हैं।पीठ ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड गुम होने की दलील स्वीकार नहीं की जा सकती और अगली सुनवाई तक दस्तावेज पेश नहीं किए गए तो आयोग के खिलाफ प्रतिकूल कानूनी निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शेषाद्रि नायडू ने बताया कि वर्ष 2023 में हुई मूल मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं मिल रही है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि संबंधित फुटेज खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आयोग की ओर से दी गई इस जानकारी पर पीठ ने असंतोष जताया। अदालत ने सवाल किया कि जब चुनाव कराना आयोग का प्रमुख दायित्व है, तो चुनाव से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड उसके पास सुरक्षित क्यों नहीं हैं। पीठ ने कहा कि आयोग यह दावा नहीं कर सकता कि उसका रिकॉर्ड खो गया है। अदालत ने इस तरह की दलीलों को अस्वीकार्य बताते हुए उपलब्ध दस्तावेजों को अगली सुनवाई में पेश करने का निर्देश दिया।
पीठ ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय तक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए, तो आयोग के विरुद्ध प्रतिकूल कानूनी निष्कर्ष निकाला जा सकता है। अदालत ने फिलहाल उपलब्ध सभी रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 को निर्धारित की गई है।
यह विवाद कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में शृंगेरी सीट के नतीजे से जुड़ा है। उस चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार टीडी राजेगौड़ा को 201 वोटों के अंतर से विजेता घोषित किया गया था। भाजपा उम्मीदवार डीएनए जीवराज ने चुनाव परिणाम को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद मतगणना में इस्तेमाल किए गए डाक मतपत्रों को लेकर कानूनी विवाद शुरू हुआ।
अप्रैल 2026 में हाई कोर्ट ने डाक मतपत्रों की दोबारा गिनती का आदेश दिया। इसके बाद 3 मई 2026 को संशोधित परिणाम जारी किया गया। इस परिणाम में राजेगौड़ा के मतों की संख्या घट गई और जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया। इस बदलाव के बाद चुनाव परिणाम को लेकर विवाद और आगे बढ़ा।
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राजेगौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए विधायक पद पर बने रहने की अनुमति दी थी। राजेगौड़ा की दलील है कि हाई कोर्ट ने केवल 279 खारिज किए गए डाक मतपत्रों की दोबारा जांच करने का आदेश दिया था। उनके अनुसार, चुनाव अधिकारी ने इसके अतिरिक्त 562 वैध डाक मतपत्रों का भी पुनर्मूल्यांकन किया, जबकि ऐसा करना निर्धारित अधिकार क्षेत्र से बाहर था।
राजेगौड़ा ने मतगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता स्पष्ट करने के लिए पर्यवेक्षक की रिपोर्ट के साथ वर्ष 2023 की मूल मतगणना और पुनर्गणना की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की मांग की थी। इसी रिकॉर्ड के नहीं मिलने के कारण अब निर्वाचन आयोग की भूमिका पर अदालत ने सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को उपलब्ध दस्तावेज पेश करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई 15 फरवरी 2027 तक स्थगित कर दी है।
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