
उज्जैन। कम बारिश और भूजल स्तर गिरने से जिले में रबी सीजन की तैयारियों पर असर पडऩे लगा है। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से जिले के ग्रामीण क्षेत्र में गेहूं की बोवनी को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। इस बार जिले में गेहूं का रकबा घटने की आशंका है।
दूसरी ओर, बीते एक सप्ताह में मंडी में गेहूं के भाव करीब 300 रुपए प्रति क्विंटल उछाल के साथ 3,500 रुपए तक पहुंच रहे हैं। खुदरा बाजार में आटा भी 40 रुपए किलो से महंगा बिक रहा है। किसानों की उत्पादन संबंधी चिंता के साथ आम परिवारों का रसोई बजट भी प्रभावित हो रहा है। उज्जैन जिले में पिछले साल करीब 1.60 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बोवनी हुई थी। इस बार इसका रकबा घटकर करीब 1.40 हजार हेक्टेयर या इससे कम रहने का अनुमान है। ग्रामीण क्षेत्र में बोरिंग का जलस्तर नीचे जाने से सिंचाई का संकट गहराया है। बडऩगर, घटिया, घोंसला और उन्हेल रोड क्षेत्र में भी कुछ किसान कम पानी में तैयार होने वाली चना, मटर और मसूर जैसी फसलों का विकल्प तलाश रहे हैं।
मंडी में तेजी, आटे की कीमत भी बढ़ी
गेहूं कारोबारी के मुताबिक, मंडी में मध्यम गुणवत्ता के गेहूं का भाव एक सप्ताह पहले करीब 3,200 रुपए प्रति क्विंटल या इससे कम था, जो अब बढ़कर 3,500 रुपए तक पहुंच रहा है। बाजार में उपलब्धता, मांग और आगामी उत्पादन को लेकर बनी चिंता को तेजी की वजह माना जा रहा है। हालांकि, कीमतों में उतार-चढ़ाव के पीछे मंडी में आवक और उपलब्ध स्टॉक जैसे कारक भी महत्वपूर्ण हैं। खुले बाजार में आटे के भाव 3,800 से 4,000 रुपए प्रति क्विंटल तक बताए जा रहे हैं। खुदरा बाजार में इसकी कीमत करीब 38 से 40 रुपए किलो या इससे अधिक है। पहले 33 से 35 रुपए किलो मिलने वाला आटा अब 40 रुपए का स्तर पार कर रहा है। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों के घरेलू खर्च पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
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