
नई दिल्ली। इजरायल (Israel) में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। हालिया चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद सरकार (Government) बनाने के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई है। इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने देश की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि इजरायल को बाहर से ईरान और उसके सहयोगियों से खतरा है, जबकि भीतर कट्टरपंथी इस्लाम एक बड़ी चुनौती बन रहा है। उन्होंने विपक्ष पर ऐसी पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया, जिन्हें वह आतंकवाद का समर्थक मानते हैं।
नेतन्याहू ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए कट्टरपंथी इस्लाम को यूरोप के कई देशों के लिए भी गंभीर चुनौती बताया। उनके मुताबिक, इसका असर इजरायल पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान और उसके सहयोगियों से देश को बाहरी खतरा है, जबकि इस्लामवादी पार्टियों के जरिए भीतर से चुनौती मिल रही है।
विपक्ष पर हमास समर्थक दलों के सहारे सरकार बनाने का आरोप
नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता ऐसी पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो हमास का समर्थन करती हैं। उनका कहना है कि इन दलों की सरकार में भागीदारी से इजरायल की यहूदी पहचान कमजोर हो सकती है और देश की रक्षा करने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।
उन्होंने दावा किया कि इन पार्टियों के प्रतिनिधियों ने हमास की नुखबा यूनिट के उन सदस्यों के समर्थन में बयान दिए हैं, जो इजरायल की जेलों में बंद हैं। नेतन्याहू ने सवाल उठाया कि ऐसी पार्टियों के समर्थन पर निर्भर सरकार देश की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना कैसे कर पाएगी।
लिकुड के नेतृत्व में राष्ट्रीय सरकार बनाने की अपील
विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाने के साथ नेतन्याहू ने व्यापक राष्ट्रीय सरकार बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार का नेतृत्व उनकी लिकुड पार्टी करे। इसमें राष्ट्रीय गठबंधन के सभी घटकों के साथ वे जियोनिस्ट पार्टियां भी शामिल हों, जो सरकार में आने के लिए तैयार हैं।
नेतन्याहू ने वामपंथी गठबंधन के नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष उन पार्टियों के समर्थन से अल्पमत सरकार बनाना चाहता है, जिन्हें वह आतंकवाद का समर्थक मानते हैं। उनके मुताबिक, विपक्ष ऐसा करके राष्ट्रीय हितों के बजाय राजनीतिक फायदे को प्राथमिकता दे रहा है।
चुनाव में विदेशी दखल की जांच की मांग
नेतन्याहू ने इजरायल के हालिया चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप की आशंका भी जताई है। उन्होंने दावा किया कि कुछ विदेशी देशों ने चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने के लिए बड़ी रकम खर्च की हो सकती है। उन्होंने इस पूरे मामले की गहराई से जांच कराने की मांग की।
इससे पहले इजरायल की घरेलू खुफिया एजेंसी शिन बेट ने केंद्रीय चुनाव समिति को कथित तौर पर जानकारी दी थी कि चुनाव अभियान के दौरान विदेशी फंडिंग और प्रभाव डालने की कोशिशों से जुड़े इनपुट मिले हैं।
राष्ट्रपति ने शुरू की सरकार गठन की प्रक्रिया
इजरायल में 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। ऐसे में अगली सरकार के गठन के लिए राजनीतिक दलों के बीच बातचीत जरूरी हो गई है। राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने बुधवार, 4 नवंबर को विभिन्न दलों के नेताओं और प्रतिनिधियों से मुलाकात शुरू की।
दो दिन तक चलने वाली इन बैठकों में राष्ट्रपति संसद में सीटें हासिल करने वाले दलों की राय जान रहे हैं। उनसे पूछा जा रहा है कि वे किस नेता को सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपने की सिफारिश करते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति की ओर से सरकार बनाने का मौका पाने वाले नेता को बहुमत जुटाने के लिए अन्य दलों से बातचीत करनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया में कई सप्ताह लग सकते हैं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved