नई दिल्ली। भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी (Mehul Choksi) का कानूनी पक्ष रखने वाले भारतीय क्रिमिनल डिफेंस वकील विजय अग्रवाल (Lawyer Vijay Aggarwal)को ब्रिटेन (Britain) में कथित इमिग्रेशन उल्लंघन के मामले में हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटिश इमिग्रेशन अधिकारियों ने लंदन के पॉश मेफेयर इलाके में स्थित एक संपत्ति का निरीक्षण किया, जिसके बाद अग्रवाल को हिरासत में लिया गया।
बताया जा रहा है कि अधिकारियों की कार्रवाई के समय अग्रवाल की फर्म से जुड़े कुछ जूनियर वकील भी उस परिसर में मौजूद थे। हालांकि, इस पूरे मामले में अभी तक ब्रिटिश अधिकारियों की ओर से कोई सार्वजनिक आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि विजय अग्रवाल पर ब्रिटेन में जरूरी वर्क परमिट के बिना पेशेवर गतिविधियों में शामिल होने और अन्य इमिग्रेशन नियमों के कथित उल्लंघन का आरोप है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल उनकी हिरासत या आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। ब्रिटेन के होम ऑफिस, बॉर्डर फोर्स, मेट्रोपॉलिटन पुलिस या किसी अदालत की ओर से भी इस संबंध में पुष्टि नहीं की गई है।
विजय अग्रवाल का नाम सबसे ज्यादा मेहुल चोकसी के कानूनी मामलों के कारण चर्चा में रहा है। चोकसी पंजाब नेशनल बैंक (PNB) धोखाधड़ी मामले में भारत में वांछित कारोबारी है।
अग्रवाल ने भारत में चोकसी की ओर से कई कानूनी कार्यवाहियों में पैरवी की है। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट समेत विभिन्न मंचों पर चोकसी के प्रत्यर्पण से जुड़े मामलों में उसका पक्ष रखा है।
बेल्जियम में चोकसी की गिरफ्तारी के बाद भी अग्रवाल उसकी कानूनी टीम से जुड़े रहे। प्रत्यर्पण का विरोध करते हुए उनकी ओर से मानवाधिकार, जेल की परिस्थितियों और चोकसी की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों जैसे मुद्दे उठाए जाते रहे हैं।
चोकसी मामले के अलावा विजय अग्रवाल की कानूनी प्रैक्टिस बड़े आर्थिक अपराध और कॉरपोरेट मामलों से भी जुड़ी रही है। वह करीब 1.8 अरब डॉलर के पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी मामले में बचाव पक्ष की कानूनी कार्यवाही से जुड़े रहे हैं।
इसके अलावा उनका नाम 2G स्पेक्ट्रम मामले से संबंधित कानूनी मामलों में भी सामने आया है।
ब्रिटेन में हुई कथित कार्रवाई को लेकर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अधिकारियों ने मेफेयर स्थित संपत्ति पर किस आधार पर कार्रवाई की और अग्रवाल पर वास्तव में कौन से इमिग्रेशन नियम तोड़ने का आरोप लगाया गया है।
जब तक ब्रिटिश अधिकारियों या अदालत की ओर से औपचारिक जानकारी सामने नहीं आती, तब तक हिरासत और कथित उल्लंघन से जुड़े दावों को रिपोर्ट्स के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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