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सालों बाद बन रहा ऐसा संयोग, शनि अमावस्या और सूर्य ग्रहण एक साथ, करें ये विशेष उपाय

नई दिल्‍ली। साल 2021 के आखिरी महीने दिसंबर की 4 तारीख यानी कल सूर्य ग्रहण और शनि अमावस्या एक साथ है। हालांकि, 4 दिसंबर को लग रहा सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, जिसकी वजह से इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा, लेकिन ये ग्रहण सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा। ज्योतिष (Astrology) के अनुसार यदि ग्रहण और शनि अमावस्या के दौरान कुछ उपाय किए जाएं तो दोनों ही ग्रहों को अनुकूल किया जा सकता है। आइये बताते हैं इन उपायों के बारे में…

सूर्य ग्रहण का समय (Surya grahan 2021 timing in India)
आंशिक सूर्य ग्रहण सुबह 10:59 बजे शुरू होगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण दोपहर 12:30 बजे से शुरू होगा और अधिकतम ग्रहण दोपहर 01:03 बजे लगेगा। पूर्ण ग्रहण दोपहर 01:33 बजे समाप्त होगा और अंत में आंशिक सूर्य ग्रहण दोपहर 3:07 बजे समाप्त होगा। 4 दिसंबर का सूर्य ग्रहण एक ध्रुवीय ग्रहण (polar eclipse) के रूप में दिखाई देगा, जो अंटार्कटिका महाद्वीप पर होगा। हालांकि, यह भारत से दिखाई नहीं देगा, लेकिन इसे दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिणी अटलांटिक के देशों से देखा जा सकेगा। भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।

शनि अमावस्या तिथि व समय (Surya grahan on Shani Amavasya)
पंचाग के अनुसार मार्गशीर्ष (Margashirsha) माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 03 दिसंबर को शाम 04 बजकर 55 मिनट से शुरू होकर, 04 दिसंबर दिन शनिवार को दोपहर 01 बजकर 12 मिनट तक है। ऐसे में शनैश्चरी अमावस्या उदयातिथि की वजह से 04 दिसंबर को मान्य है।

इन चीजों का करें दान (Surya grahan 2021 upaay)
सूर्यग्रहण और शनि अमावस्या (Shani Amavasya) के दौरान धन लाभ के लिए के लिए अनाज, शत्रुओं के अंत के लिए काले तिल, विपत्ति से सुरक्षा के लिए छाता और शनि के प्रभाव से मुक्ति के लिए सरसों का तेल दान करें। इसके अलावा ये भी कर सकते हैं…

व्रत का लें संकल्प
शनि अमावस्या के दिन स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शनि देव की विधिपूर्वक पूजा करें।
शनि देव का सरसों के तेल और काले तिल से अभिषेक करें।
शनि मंदिर जाएं और उनके दर्शन कर शनि दोष से मुक्ति की प्रार्थना करें।
शनि अमावस्या और ग्रहण के दिन शनि-दोष से छुटकारा के लिए शमी-पेड़ की पूजा करें।
ग्रहण समाप्त होने के बाद शाम के वक्त इस पेड़ के नीचे सरसों का दीया जलाएं।
शनि मंदिर जाकर साफ-सफाई करें और शनिदेव को नीले फूल अर्पित करें।
शिव सहस्त्रनाम का पाठ करें, इससे शनि के प्रकोप का भय समाप्त हो जाता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं

नोट– उपरोक्त दी गई जानकारी व सूचना सामान्य उद्देश्य के लिए दी गई है। हम इसकी सत्यता की जांच का दावा नही करतें हैं यह जानकारी विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, धर्मग्रंथों, पंचाग आदि से ली गई है । इस उपयोग करने वाले की स्वयं की जिम्मेंदारी होगी ।

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