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AI ने खोली 2 करोड़ रुपये के वेतन घोटाले की पोल, 3 पुलिसकर्मी गिरफ्तार

July 01, 2026

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में पुलिस विभाग के भीतर करीब 2 करोड़ रुपये के कथित वेतन घोटाले का खुलासा हुआ है। खास बात यह है कि यह गड़बड़ी कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी कि AI की मदद से किए गए ऑडिट के दौरान सामने आई। मामले में पुलिस विभाग के 3 कॉन्स्टेबल को गिरफ्तार कर लिया गया है। PTI की खबर के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने वेतन रिकॉर्ड में हेराफेरी कर करीब 3 साल की अवधि के दौरान सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये निकाल लिए।

बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा ने बताया कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आंतरिक और बाहरी ऑडिट किया गया था। इसी दौरान AI आधारित ऑडिट में वेतन खर्च में असामान्य बढ़ोतरी दिखाई दी। इसके बाद वेतन रिकॉर्ड की गहराई से जांच की गई, जिसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ। इस मामले में आरक्षक गिरीश राय, राजकुमार कतलम और हेमंत मैथ्यू को गिरफ्तार किया गया है। गिरीश राय पुलिस अधीक्षक कार्यालय की वेतन शाखा में सहायक के रूप में तैनात था, जबकि बाकी दोनों सिपाही अन्य शाखाओं में कार्यरत थे।

जांच में सामने आया कि गिरीश राय वेतन तैयार करने की प्रक्रिया से पहले रिकॉर्ड की सॉफ्ट कॉपी में बदलाव कर देता था। इसके बाद वह अपना और 2 अन्य सिपाहियों का वेतन बढ़ाकर सरकारी खाते से अतिरिक्त रकम निकलवा लेता था। पूछताछ के दौरान उसने अपना अपराध भी स्वीकार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने अक्टूबर 2023 से मई 2026 के बीच सरकारी खातों से करीब 1.5 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक की रकम अवैध तरीके से निकाली।


  • गिरीश राय 2012 से SP ऑफिस में तैनात था और उसकी नियुक्ति अनुकंपा के आधार पर हुई थी। पुलिस उसे पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड मान रही है। जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, गिरीश राय ने कुछ कर्मचारियों का वेतन यह कहकर बढ़ाया कि उन्हें लोन दिया जा रहा है। बाद में वह उसी बढ़ी हुई रकम को लोन की किस्त या वापसी के नाम पर कैश में वापस ले लेता था। पुलिस ने ऐसे कर्मचारियों की पहचान कर ली है, जिन्हें इस तरह का फायदा मिला था। अब उनसे पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे इस साजिश में शामिल थे या नहीं।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस विभाग में हर महीने वेतन पर होने वाला खर्च कर्मचारियों के तबादले, नई पोस्टिंग और संख्या में बदलाव के कारण लगातार बदलता रहता है। इसी वजह से वेतन खर्च में हुई गड़बड़ियां लंबे समय तक सामान्य बदलाव की तरह दिखती रहीं। आरोपी हर महीने अपने और कुछ अन्य लोगों के वेतन में थोड़ी-थोड़ी बढ़ोतरी कर रकम निकालते रहे। यह प्रक्रिया कई महीनों तक चलती रही और किसी को शक नहीं हुआ।

    इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब AI की मदद से वेतन खर्च का ऑडिट किया गया। AI टूल्स ने वेतन भुगतान में असामान्य बढ़ोतरी की पहचान की। इसके बाद जांचकर्ताओं ने वेतन रिकॉर्ड, सॉफ्ट कॉपी और बैंकिंग लेन-देन की विस्तार से जांच की, जिससे करोड़ों रुपये के कथित गबन का पता चला। जांच के बाद 29 जून को जगदलपुर थाने में तीनों सिपाहियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और सरकारी धन के गबन सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। अगले दिन उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

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