चैन्नई। तमिलनाडु की राजनीति (Tamil Nadu Politics) में उठापटक लगातार तेज होती जा रही है। अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) को मंगलवार को एक और बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के बागी विधायक ई. सुबैया (e. Subaiya) ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। बीते दो दिनों में यह चौथा इस्तीफा है, जिससे राज्य की सियासत में हलचल और बढ़ गई है।
अंबासमुद्रम सीट से विधायक ई. सुबैया ने विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा, जिसे बाद में स्वीकार कर लिया गया। इसके साथ ही 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में AIADMK की संख्या घटकर 43 रह गई।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब AIADMK प्रमुख Edappadi K. Palaniswami के नेतृत्व वाला गुट पहले से ही बगावत का सामना कर रहा है। पार्टी ने हाल ही में इस्तीफा देने वाले तीन विधायकों के त्यागपत्रों पर सवाल उठाते हुए विधानसभा अध्यक्ष से उन्हें स्वीकार नहीं करने की मांग की थी।
पार्टी का आरोप है कि संबंधित विधायक इस्तीफा सार्वजनिक होने से पहले ही सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल हो चुके थे। AIADMK नेताओं का कहना है कि इस्तीफों की प्रक्रिया में कानूनी और तकनीकी खामियां थीं।
“लोगों के हित में लिया फैसला”
इस्तीफे के बाद ई. सुबैया ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय अपने क्षेत्र की जनता के हित को ध्यान में रखते हुए लिया है। टीवीके में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay से मिलना कोई गलत बात नहीं है और अवसर मिला तो वे उनसे जरूर मिलेंगे।
इस्तीफे के तुरंत बाद सुबैया को टीवीके नेता और राज्य मंत्री एन. आनंद के साथ देखा गया, जिससे उनके सत्तारूढ़ दल में शामिल होने की अटकलें तेज हो गईं।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद S. Jothimani ने चिंता जताई है। उन्होंने तमिलनाडु में विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस को ऐसे राजनीतिक तरीकों का समर्थन नहीं करना चाहिए, क्योंकि पार्टी खुद भी अतीत में इस तरह की राजनीति का सामना कर चुकी है।
हालांकि, टीवीके नेता और राजस्व मंत्री केए सेंगोत्तैयान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने दी सफाई
विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने कहा कि वे पूरी प्रक्रिया कानून और नियमों के तहत चला रहे हैं। उनके मुताबिक, निर्धारित प्रारूप में दिए गए इस्तीफे स्वीकार किए जा रहे हैं।
बताया गया कि सुबैया का पहला इस्तीफा तकनीकी कारणों से वापस कर दिया गया था। बाद में उन्होंने हस्तलिखित इस्तीफा सौंपा, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
पहले तीन विधायकों के इस्तीफे भी बने विवाद की वजह
सोमवार को AIADMK के तीन अन्य विधायक—मरगथम कुमारवेल, पी. सत्यभामा और एस. जयकुमार—भी इस्तीफा देने के बाद टीवीके में शामिल हो गए थे। AIADMK और द्रमुक दोनों ने इसे खुला दलबदल बताया है।
AIADMK के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि इस्तीफा देने के कुछ ही मिनटों बाद इन नेताओं को टीवीके की सदस्यता दे दी गई। पार्टी ने यह भी दावा किया कि विश्वास मत के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले 25 विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिका अब भी लंबित है, ऐसे में इस्तीफे स्वीकार नहीं किए जाने चाहिए थे।
टीवीके सूत्रों के मुताबिक, इस्तीफा देने वाले पूर्व विधायकों को आगामी उपचुनावों में पार्टी उम्मीदवार बनाया जा सकता है। लगातार हो रहे इस्तीफों के बाद शणमुगम-वेलुमणि खेमे ने भी रणनीति तय करने के लिए बैठक बुला ली है।
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