
नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में शनि देव (Lord Shani) को कर्मों के अनुसार फल देने वाला और न्याय का देवता माना जाता है। उनकी चाल में होने वाला हर परिवर्तन सभी 12 राशियों (Zodiac signs) के साथ-साथ देश-दुनिया पर भी प्रभाव डालता है। वर्तमान में शनि देव मीन राशि में सीधी चाल से भ्रमण कर रहे हैं, लेकिन 27 जुलाई 2026 से उनकी चाल बदलने जा रही है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, 27 जुलाई 2026 को शनि देव मीन राशि में वक्री (उल्टी चाल) हो जाएंगे। यह स्थिति 11 दिसंबर 2026 तक बनी रहेगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शनि की यह वक्री चाल सभी राशियों के लिए समान परिणाम नहीं देगी। कुछ राशियों के लिए यह अवधि तरक्की, आर्थिक लाभ और नए अवसरों का द्वार खोल सकती है।
मेष राशि
मेष राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में आ रही बाधाओं से राहत मिल सकती है। नौकरी और व्यवसाय में स्थिति मजबूत होगी। लंबे समय से अटका धन मिलने या अचानक आर्थिक लाभ होने के योग बन रहे हैं। करियर से जुड़ी कोई सकारात्मक खबर भी मिल सकती है।
सिंह राशि
सिंह राशि वालों के लिए यह समय भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि का संकेत दे रहा है। घर, जमीन, प्रॉपर्टी या वाहन खरीदने की इच्छा पूरी हो सकती है। यदि लंबे समय से किसी स्वास्थ्य समस्या से परेशान हैं तो उसमें भी सुधार के संकेत मिल सकते हैं।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह अवधि आर्थिक रूप से लाभकारी मानी जा रही है। व्यापार से जुड़े लोगों को नए सौदे मिलने और मुनाफा बढ़ने की संभावना है। परिवार में खुशहाली बनी रहेगी और समाज में सम्मान व आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।
धनु राशि
धनु राशि के लोगों को मानसिक तनाव और लंबे समय से चली आ रही परेशानियों से राहत मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी और परिवार का सहयोग मिलेगा। इस दौरान कोई शुभ समाचार मिलने के भी संकेत हैं।
शनि के वक्री काल में करें ये उपाय
– प्रत्येक शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसमें काले तिल अवश्य डालें।
– शनिवार के दिन नियमित रूप से हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। मान्यता है कि हनुमान जी की आराधना से शनि देव प्रसन्न होते हैं।
– गरीब, जरूरतमंद और श्रमिक वर्ग के लोगों का सम्मान करें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, काले वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है।
(नोट: यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक एवं पारंपरिक जानकारी साझा करना है।)
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