
नई दिल्ली। ‘शहरी सहकारी बैंकों (‘Urban Cooperative Banks’) को बदलते बैंकिंग दौर के साथ कदम मिलाने के लिए अब तकनीक (Technology ), पारदर्शिता (Transparency) और आधुनिक ग्राहक सेवाओं (Modern Customer Services) पर तेजी से काम करना होगा।’ केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने मुंबई में नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनयूसीएफडीसी) के नए कार्यालय के उद्घाटन के दौरान यह बात कही।
अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के दौर में वही संस्थाएं आगे बढ़ पाएंगी, जो समय के साथ खुद को बदलेंगी। ऐसे में शहरी सहकारी बैंकों के लिए तकनीक और पारदर्शिता अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुकी है।
RBI और सहकारी बैंकों के बीच बदलेगा नजरिया?
अमित शाह ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और शहरी सहकारी बैंकों के बीच आपसी सोच में बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने अपने पांच साल के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि जब भी सहकारिता क्षेत्र ने आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की कोशिश की, आरबीआई ने सहयोग किया।
उन्होंने बताया कि आरबीआई ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए शाखाएं खोलने से जुड़े नियमों को आसान किया है। इसके चलते बैंक अब डोरस्टेप बैंकिंग, डिमांड ड्राफ्ट और लाइफ सर्टिफिकेट जैसी सेवाएं भी उपलब्ध करा रहे हैं।
अमित शाह के मुताबिक, छह लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की जमा राशि वाले इस क्षेत्र के लिए आरबीआई ने एक विशेष नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया है। वहीं, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की ओर से घोषित ‘ऑन-टैप’ लाइसेंसिंग व्यवस्था से करीब दो दशक से रुका शहरी सहकारी बैंकों का विस्तार फिर शुरू होने की उम्मीद है।
1,400 में से 690 बैंक एनयूसीएफडीसी से जुड़े
अमित शाह ने बताया कि देश में करीब 1,400 शहरी सहकारी बैंक हैं। इनमें से 690 बैंक अब तक एनयूसीएफडीसी के सदस्य बन चुके हैं। उन्होंने बाकी बैंकों से भी एक साल के भीतर इससे जुड़ने की अपील की। उन्होंने एनयूसीएफडीसी से सदस्यता शुल्क कम करने पर भी विचार करने को कहा, ताकि ज्यादा से ज्यादा शहरी सहकारी बैंक इस व्यवस्था का हिस्सा बन सकें।
अमित शाह ने छोटे कर्जदारों को शहरी सहकारी बैंकों के लिए सुरक्षित ग्राहक बताया। उन्होंने गुजरात के एक बैंक का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बिना गारंटी दिए गए 2.5 लाख रुपये तक के कर्ज की वसूली 99 फीसदी से अधिक रही।
अब महाराष्ट्र में एनयूसीएफडीसी का मुख्यालय
एनयूसीएफडीसी अपना मुख्य कार्यालय नई दिल्ली से महाराष्ट्र स्थानांतरित कर रहा है। अमित शाह ने इसे सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। देश में शहरी सहकारी बैंकों के वितरण की बात करें तो महाराष्ट्र की भूमिका सबसे बड़ी है। देश के कुल UCBs में से 449 बैंक अकेले महाराष्ट्र में हैं। वहीं करीब 70 फीसदी शहरी सहकारी बैंक महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और कर्नाटक में हैं।
साइबर सुरक्षा पर भी जोर
बैंकिंग व्यवस्था के डिजिटल होने के साथ साइबर सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन गई है। इसी को देखते हुए शहरी सहकारी बैंकों को तकनीकी सहायता और साइबर सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य बैंकों को तकनीकी रूप से मजबूत करना और साइबर खतरों से निपटने में उनकी मदद करना है।
अमित शाह ने सहकारी क्षेत्र की ताकत समझाने के लिए अमूल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अमूल ने 1.25 लाख करोड़ रुपये का टर्नओवर खड़ा किया है। इसी तरह सहकारी बैंक भी छोटे उद्यमियों और कारोबारियों को वित्तीय मदद देकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। गृह मंत्री शाह ने कहा कि देश को समृद्ध बनाने के लिए सिर्फ पूंजी बाजार पर्याप्त नहीं है। इसके साथ स्व-रोजगार का मजबूत ढांचा भी जरूरी है।
एनयूसीएफडीसी से UCBs को क्या फायदा होगा?
एनयूसीएफडीसी आरबीआई से मान्यता प्राप्त शीर्ष स्व-नियामक संस्था है। इसका उद्देश्य शहरी सहकारी बैंकों को एक साझा मंच और जरूरी तकनीकी व वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराना है। मुंबई स्थित मुख्यालय से यह संस्था बैंकों को पूंजी, आईटी ढांचा, साइबर सुरक्षा और लिक्विडिटी जैसी सुविधाओं में सहायता देगी।
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