
कटड़ा। लगातार हो रही बारिश ने बुधवार को माता वैष्णो देवी के दरबार जाने वाले श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ा दीं। लेकिन आस्था का सैलाब ऐसा कि खराब मौसम भी भक्तों के कदम नहीं रोक पाया। बुधवार को दोपहर तक उमस ने लोगों को बेहाल किया, फिर अचानक आसमान से बादल बरसे। करीब 2 से 3 घंटे तक तेज बारिश होती रही। इस दौरान भवन मार्ग पर कई जगह कंकड़-पत्थर और मलबा आ गया। कुछ हिस्सों में हल्का भूस्खलन भी हुआ, जिससे रास्ता फिसलन भरा हो गया।
बैटरी कार मार्ग बंद, सेवा स्थगित
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने दोपहर करीब 3 बजे बैटरी कार मार्ग को अगले आदेश तक बंद कर दिया। इस रूट पर चलने वाली बैटरी कार सेवा भी तुरंत रोक दी गई। यह पहली बार नहीं था। मंगलवार रात भी तेज बारिश के चलते रात 10 बजे यह मार्ग बंद करना पड़ा था। बुधवार सुबह 6 बजे सफाई के बाद इसे खोला गया था, लेकिन दोपहर की बारिश ने फिर हालात बिगाड़ दिए।
हालांकि बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए परेशानी बढ़ी, पर यात्रा रुकी नहीं। पारंपरिक मार्ग से श्रद्धालु पैदल, घोड़े, पिट्ठू और पालकी के सहारे लगातार भवन की ओर बढ़ते रहे। माता के जयकारों के बीच दर्शन का सिलसिला चलता रहा।
हेलीकॉप्टर-रोपवे सेवा पर भी असर
खराब मौसम की मार हवाई सेवाओं पर भी पड़ी। कटड़ा से चलने वाली हेलीकॉप्टर सेवा दिनभर बंद रही। भवन से भैरव घाटी के बीच चलने वाली रोपवे सेवा को भी तेज बारिश और हवाओं के चलते कुछ घंटों के लिए रोकना पड़ा। राहत की बात यह रही कि शाम 5 बजे मौसम सुधरते ही रोपवे फिर शुरू कर दी गई। लेकिन खबर लिखे जाने तक हेलीकॉप्टर और बैटरी कार सेवा बंद थी।
श्राइन बोर्ड ने बैटरी कार मार्ग पर सफाई कर्मियों और आपदा प्रबंधन की टीम तैनात कर दी है। मलबा हटाने का काम लगातार चल रहा है। बोर्ड ने साफ किया कि मौसम पूरी तरह सामान्य होने और सुरक्षा जांच के बाद ही यह मार्ग दोबारा खोला जाएगा। यात्रा को सुरक्षित रखने के लिए श्राइन बोर्ड, पुलिस, सीआरपीएफ और आपदा प्रबंधन की टीमें जगह-जगह मुस्तैद हैं। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि प्रशासन के निर्देश मानें और किसी भी परेशानी में नजदीकी सूचना केंद्र से संपर्क करें।
18 हजार ने किए दर्शन, सिलसिला जारी
बारिश और बंद रास्तों के बावजूद भक्तों का जोश कम नहीं हुआ। बुधवार शाम 5 बजे तक करीब 18 हजार श्रद्धालु पंजीकरण कराकर भवन के लिए रवाना हो चुके थे। देर शाम तक भी भक्तों का आना जारी था।
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