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हॉस्टल में पिटाई, मजदूरी, वसूली… कलेक्टर को सुनाई टॉर्चर की कहानी

July 16, 2026

बैतूल: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक अनूठा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है. यहां पाढर स्थित पीएम श्री हायर सेकेंडरी स्कूल छात्रावास के 33 छात्र अपनी गंभीर समस्याओं और शिकायतों को लेकर गुरुवार को करीब 18 किलोमीटर का लंबा रास्ता पैदल तय करके सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंच गए. कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाले इन आदिवासी छात्रों की जिद थी कि वे अपनी आपबीती सिर्फ और सिर्फ जिला कलेक्टर को ही सुनाएंगे. मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल एक्शन लिया है.

कलेक्ट्रेट परिसर में छात्रों के अचानक पहुंचने से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया. परिसर में पहुंचते ही एसडीएम (SDM) और तहसीलदार सहित कई आला अधिकारियों ने बच्चों को समझाने और उनकी समस्याएं जानने का प्रयास किया. इसके अलावा जिला पंचायत उपाध्यक्ष हंसराज धुर्वे ने भी छात्रों से काफी देर तक संवाद किया.

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने तत्काल पाढर छात्रावास के अधीक्षक सिरसाम सिंह परते को भी कलेक्ट्रेट तलब किया. हालांकि, व्यवस्था से बुरी तरह नाराज हो चुके छात्रों ने किसी भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि के सामने अपनी शिकायतें खोलने से साफ मना कर दिया. उनका कहना था कि वे केवल सर्वोच्च जिला अधिकारी के सामने ही अपना पक्ष रखेंगे.


  • छात्रों की दृढ़ता को देखते हुए बैतूल कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने संवेदनशीलता दिखाई और बच्चों को अपने चेंबर में बुलाकर अलग से उनसे लंबी बातचीत की. बंद कमरे में हुए इस संवाद के दौरान छात्रों का दर्द छलक पड़ा. छात्रों ने छात्रावास अधीक्षक के व्यवहार को लेकर बेहद संगीन आरोप लगाए. उन्होंने बताया कि हॉस्टल में उनके साथ अक्सर मारपीट की जाती है और उनसे अधीक्षक के निजी काम (मजदूरी) कराए जाते हैं.

    छात्रों का यह भी आरोप था कि छात्रावास से थोड़ी देर से लौटने पर या फिर बीमार होने पर इलाज कराने के नाम पर उनसे रुपयों की मांग की जाती है. एक छात्र ने रोते हुए बताया कि खेल के दौरान सिर्फ गेंद को लेकर हुए एक मामूली विवाद के बाद अधीक्षक ने उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी थी. पीड़ित छात्रों ने कलेक्टर के सामने दोटूक शब्दों में कहा कि या तो हॉस्टल में यह अधीक्षक रहेंगे या फिर वे सभी एक साथ छात्रावास छोड़ देंगे.

    बच्चों की शिकायतों और उनके 18 किलोमीटर पैदल चलने के साहस को देखते हुए कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने तुरंत कड़ा रुख अख्तियार किया. कलेक्टर ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन कर दिया है. समिति को आदेश दिया गया है कि वह तीन दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपे. निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और हॉस्टल का माहौल शांत रखने के लिए आरोपी अधीक्षक सिरसाम सिंह परते को तत्काल प्रभाव से पाढर छात्रावास से हटा दिया गया है. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर दोषी के खिलाफ कठोर विधिक व विभागीय कार्रवाई की जाएगी.

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