कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में पहली बार आधिकारिक रूप से मनाए जा रहे पश्चिमबंग दिवस से पहले राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनकी राजनीति ने राज्य में तुष्टीकरण और कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया।
एक विशेष साक्षात्कार में भट्टाचार्य ने दावा किया कि ममता बनर्जी की नीतियां पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक पहचान को कमजोर करने वाली रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति के जरिए राज्य को “पश्चिम बांग्लादेश” बनाने की कोशिश की गई, लेकिन जनता ने इस सोच को स्वीकार नहीं किया।
भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल के इतिहास, संस्कृति और विभाजन से जुड़े तथ्यों को लंबे समय तक राजनीतिक कारणों से नजरअंदाज किया गया। उनके मुताबिक, बंगाली हिंदुओं के हितों और ऐतिहासिक योगदान को पर्याप्त सम्मान नहीं मिला, जबकि घुसपैठ और वोट बैंक की राजनीति को बढ़ावा दिया गया।
भाजपा लंबे समय से 20 जून को पश्चिम बंगाल का स्थापना दिवस घोषित करने की मांग करती रही है। पार्टी का तर्क है कि 20 जून 1947 को बंगाल के विभाजन और पश्चिम बंगाल के गठन की दिशा में ऐतिहासिक फैसला हुआ था। इसी कारण भाजपा इस दिन को राज्य के इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव मानती है।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले इस अवधारणा का विरोध करती रही हैं। उनकी सरकार की ओर से गठित समिति ने बंगाली नववर्ष ‘पोइला बोइसाख’ को राज्य स्थापना दिवस के रूप में मान्यता देने का सुझाव दिया था। इस मुद्दे पर राज्य में कई वर्षों से राजनीतिक और वैचारिक बहस जारी है।
भट्टाचार्य ने कहा कि पोइला बोइसाख बंगाली संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है, लेकिन उसका पश्चिम बंगाल के गठन से कोई प्रत्यक्ष ऐतिहासिक संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने राजनीतिक कारणों से इतिहास की व्याख्या बदलने की कोशिश की।
ब्रिटिश भारत के विभाजन से पहले 20 जून 1947 को बंगाल विधानसभा में प्रांत के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण मतदान हुआ था। उस समय सवाल यह था कि बंगाल एकजुट रहकर भारत या पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा अथवा उसका विभाजन किया जाएगा।
संयुक्त सत्र में बहुमत ने एकीकृत बंगाल को पाकिस्तान में शामिल करने का समर्थन किया था। हालांकि पश्चिमी क्षेत्र के प्रतिनिधियों की अलग बैठक में बंगाल के विभाजन और पश्चिम बंगाल को भारत में शामिल करने के पक्ष में मतदान हुआ। वहीं पूर्वी बंगाल के प्रतिनिधियों ने विभाजन का विरोध किया, लेकिन यदि विभाजन होता है तो पूर्वी बंगाल को पाकिस्तान में शामिल करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
अंततः बंगाल का विभाजन हुआ और पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना, जबकि पूर्वी बंगाल पाकिस्तान में शामिल हुआ, जो बाद में बांग्लादेश बना।
भाजपा पश्चिम बंगाल के गठन का श्रेय प्रमुख रूप से श्यामा प्रसाद मुखर्जी को देती है। पार्टी का कहना है कि उन्होंने बंगाली हिंदुओं के लिए अलग राज्य की मांग को मजबूती से उठाया था। भट्टाचार्य ने इस आंदोलन में हिंदू महासभा के अन्य नेताओं के योगदान का भी उल्लेख किया और कहा कि कई नेताओं ने विभाजन के समय पश्चिम बंगाल के गठन के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
इस वर्ष पहली बार आयोजित हो रहे पश्चिमबंग दिवस समारोह को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय बंगाल यात्रा के दौरान कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनकी मौजूदगी के कारण इस आयोजन पर राष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य स्थापना दिवस को लेकर जारी बहस केवल इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बंगाल की पहचान, संस्कृति और भविष्य की राजनीति से भी जुड़ा मुद्दा बन चुका है।
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