
जबलपुर। कूनो नेशनल पार्क से लाए गए एक चीते की जबलपुर में उपचार के दौरान मौत हो गई। चीते के शरीर में कई जगह बंदूक के छर्रे धंसे हुए थे। जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के वेटरनरी साइंस कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर पांच छर्रे निकाले, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद चीते को बचाया नहीं जा सका।
कॉलेज के पशु चिकित्सा शल्य चिकित्सा एवं रेडियोलॉजी विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, चीते को 26 अक्टूबर 2026 की रात लगभग 11:50 बजे उपचार के लिए लाया गया था। उसके शरीर पर कई घाव थे। रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण उसके पिछले दोनों पैर काम नहीं कर रहे थे। साथ ही, उसे पेशाब करने में भी परेशानी हो रही थी। इन लक्षणों से गंभीर तंत्रिका संबंधी चोट की आशंका जताई गई। चोटों की स्थिति और विस्तार का पता लगाने के लिए चीते का सीटी स्कैन किया गया। जांच में कमर की रीढ़ की हड्डी के पास, बाएं कंधे के नजदीक त्वचा के नीचे और दाएं फेफड़े के ऊतकों में धातु के विदेशी पदार्थ मिले। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सामान्य बेहोशी में शल्यक्रिया की और पांच बंदूक के छर्रे सफलतापूर्वक निकाले। ऑपरेशन की निगरानी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. शोभा जावरे तथा प्रोफेसर डॉ. रणधीर सिंह ने की। इसमें स्नातकोत्तर शोधार्थियों ने भी सहयोग किया। सर्जरी के बाद चीते को गहन निगरानी और विशेष देखभाल में रखा गया, लेकिन 27 अक्टूबर की सुबह लगभग 5:10 बजे उसकी मौत हो गई। इस मामले की रिपोर्ट वन्यजीव भोपाल के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) यानी पीसीसीएफ को भी भेजे जाने की जानकारी प्रेस नोट में दी गई है।
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