नई दिल्ली। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (Commercial LPG cylinder) की कीमतों में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार ने वैश्विक बाजार का हवाला दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी (Suresh Gopi) ने कहा कि कीमतों का आकलन करते समय दुनिया के दूसरे हिस्सों में बढ़े दामों को भी देखना चाहिए और वैश्विक ऊर्जा संकट (Global energy crisis) को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
शुक्रवार को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद इसकी कीमत बढ़कर 3,071.50 रुपये हो गई। यह अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त वृद्धि मानी जा रही है। वहीं, हाल ही में बाजार में आए 5 किलोग्राम “छोटू” सिलेंडर के दाम भी 261 रुपये बढ़ाकर 810.50 रुपये कर दिए गए हैं।
मंत्री ने बढ़ोतरी पर सफाई देते हुए कहा, “दुनिया के अन्य देशों में कीमतें कितनी बढ़ी हैं, यह भी देखना चाहिए। हमने अपनी ओर से बढ़ोतरी को सीमित रखने की कोशिश की है।”
बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल आया है, जिसके कारण लगातार तीसरे महीने कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा हुआ है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी का असर आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल पर भी पड़ सकता है। हालांकि, पिछले करीब चार साल से खुदरा दरों में बड़े बदलाव नहीं होने के कारण तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में आगे कीमतों में वृद्धि से इनकार नहीं किया जा सकता।
होटल-रेस्तरां और इंडस्ट्री पर असर
कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग मुख्य रूप से होटल, रेस्तरां और छोटे व्यवसायों में होता है, इसलिए इस बढ़ोतरी का सीधा असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है।
इसके अलावा, औद्योगिक उपयोग के लिए मिलने वाले थोक डीजल की कीमत भी बढ़कर 149 रुपये प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गई है, जो पेट्रोल पंप पर मिलने वाले डीजल (करीब 87.62 रुपये प्रति लीटर) से काफी अधिक है।
कुल मिलाकर, वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत में ईंधन और गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ता दिख रहा है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं से लेकर कारोबार तक पर पड़ सकता है।
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