
नई दिल्ली. कॉमनवेल्थ 2026 (Commonwealth 2026) में भारत (India) के लिए एक यादगार शाम रही. स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में कई मेडल्स डाले. मुक्केबाजी, जूडो और एथलेटिक्स- हर मैदान पर भारतीय तिरंगा शान से लहराया.
मेन्स जेवनलिन थ्रो (javelin throw) में भारत ने दोहरा इतिहास रचा. भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने सीजन के अपने बेस्ट 85.83 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर अपने नाम किया. वहीं, भारत के युवा खिलाड़ी यशवीर सिंह (Yashveer Singh) ने अपने करियर का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर का थ्रो फेंका और ब्रॉन्ज मेडल जीता. इस मुकाबले का गोल्ड मेडल श्रीलंका के रुमेश तरंगा पथिरागे ने 89.75 मीटर के रिकॉर्ड थ्रो के साथ जीता.
नीरज के आखिरी फाउल से थमा रोमांच
मुकाबले में नीरज चोपड़ा ने शुरुआती बढ़त बनाई थी, लेकिन श्रीलंका के एथलीट के विशाल थ्रो के बाद मुकाबला बेहद कड़ा हो गया. नीरज ने अपने छठी और आखिरी कोशिश में वापसी की पूरी कोशिश की, लेकिन उनका आखिरी थ्रो फाउल हो गया. इसके बावजूद, नीरज और यशवीर के एक साथ पोडियम पर खड़े होने से भारतीय दल में खुशी की लहर दौड़ गई. दोनों एथलीटों ने तिरंगे के साथ इस ऐतिहासिक पल का जश्न मनाया.
सिल्वर मेडल जीतने के बाद नीरज चोपड़ा ने ANI से कहा, ‘इससे एशियन गेम्स की यादें ताजा हो गईं, जहां किशोर और मैंने दोनों ने मेडल जीते थे. मैं सच में बहुत खुश हूं कि यशवीर ने इतने जरूरी पल में अपना पर्सनल बेस्ट हासिल किया. साथ में पोडियम पर होना बहुत अच्छा लगता है. राष्ट्रगान बजते हुए सुनना हमेशा खुशी की बात होती है. इसके अलावा, मैंने सीजन का बेस्ट भी हासिल किया और मेरी वापसी अच्छी चल रही है. आगे और भी कॉम्पिटिशन हैं, इसलिए मैं बहुत खुश हूं’
तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में जीता ब्रॉन्ज, रचा इतिहास
भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने मेन्स डेकाथलॉन में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है. वो कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में डेकाथलॉन में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं.
जूडो में भारत को पहला ऐतिहासिक गोल्ड
भाला फेंक के अलावा ये शाम जूडो में भी भारत के लिए ऐतिहासिक साबित हुई. महिला जूडोका अस्मिता डे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत को जूडो का पहला गोल्ड मेडल दिलाया। इसके साथ ही, भारतीय मुक्केबाजों ने भी अपना दबदबा कायम रखा. कई भारतीय मुक्केबाजों ने सेमीफाइनल मुकाबलों में एकतरफा जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई.
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