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पार्टी लाइन से हटकर बयान देने वालों पर कांग्रेस सख्त, थरूर विवाद के बहाने दिया स्पष्ट संदेश

June 23, 2026

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस पार्टी (BJP) अब सार्वजनिक मंचों पर अपनी आधिकारिक नीति से अलग राय रखने वाले नेताओं के प्रति पहले की तुलना में अधिक सख्त रुख अपनाती दिखाई दे रही है। हाल के दिनों में पार्टी सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) के कुछ बयानों पर कांग्रेस नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाओं ने यह संकेत दिया है कि संगठन के भीतर अनुशासन और विचारधारा के पालन को लेकर नया संदेश दिया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि चाहे कोई सांसद हो, विधायक हो या संगठन का पदाधिकारी, उसे पार्टी की निर्धारित नीति और विचारधारा के अनुरूप ही सार्वजनिक बयान देने होंगे। यदि कोई नेता सार्वजनिक रूप से अलग राय रखता है, तो पार्टी उससे दूरी बनाने के बजाय खुलकर उसका विरोध भी कर सकती है।

नेताओं को दिया जा रहा स्पष्ट संदेश

पार्टी के भीतर चल रहे ‘संगठन सृजन’ कार्यक्रम और विभिन्न राज्यों में आयोजित कार्यशालाओं के दौरान भी कार्यकर्ताओं और नेताओं को अनुशासन तथा पार्टी लाइन का पालन करने की सीख दी जा रही है। हालांकि, कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया है कि संगठन के आंतरिक मंचों पर अपनी राय रखने और चर्चा करने की पूरी स्वतंत्रता बनी रहेगी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि सार्वजनिक मंचों पर पार्टी की आधिकारिक सोच से अलग विचार रखने से कार्यकर्ताओं और जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी कारण अब ऐसे मामलों में त्वरित प्रतिक्रिया देने की रणनीति अपनाई जा रही है।



  • थरूर के बयानों से बढ़ा विवाद

    पार्टी के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर हाल के दिनों में अपने कुछ बयानों को लेकर कांग्रेस के भीतर चर्चा के केंद्र में रहे हैं। भारतीय नाविकों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के कदमों की सराहना करने और जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान वहां की परिस्थितियों पर सकारात्मक टिप्पणी करने के बाद पार्टी के कई नेताओं ने उनसे असहमति जताई।

    जम्मू-कश्मीर यात्रा के दौरान थरूर ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात के बाद कहा था कि राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में प्रगति दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि कई चुनौतियां अभी बाकी हैं, लेकिन बातचीत के बाद उनका दृष्टिकोण पहले की अपेक्षा अधिक सकारात्मक हुआ है।

    कांग्रेस नेताओं ने जताई नाराजगी

    थरूर की टिप्पणी पर जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के प्रवक्ता रवींद्र शर्मा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें वहां के आम लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात करनी चाहिए थी, ताकि जमीनी हालात का बेहतर आकलन हो सके। शर्मा ने यह भी याद दिलाया कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर पार्टी कार्यकर्ता लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।

    कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं

    कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि फिलहाल केरल की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए थरूर के खिलाफ कोई कठोर कदम उठाने की संभावना कम है। हालांकि, यदि भविष्य में भी उनका रुख पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग बना रहता है, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

    विवाद के बीच शशि थरूर ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उनकी संसदीय समिति का जम्मू-कश्मीर दौरा घाटी के आंतरिक राजनीतिक हालात की समीक्षा के लिए नहीं था। उन्होंने कहा कि समिति का मुख्य फोकस विदेश मामलों से जुड़े विषयों, भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन संबंधों तथा पासपोर्ट सेवाओं से संबंधित मुद्दों पर था।

    कुल मिलाकर, थरूर प्रकरण के जरिए कांग्रेस ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि पार्टी अब सार्वजनिक असहमति को लेकर पहले की तुलना में अधिक सतर्क और सक्रिय रुख अपनाने जा रही है।

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