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COP28: कार्बन उत्सर्जन घटाने पर जोर, पृथ्वी के तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री तक सीमित रखने का आह्वान

दुबई (Dubai)। पृथ्वी के तापमान में हो रही वृद्धि (increase in earth’s temperature) पर रोकथाम (Prevention) के लिए कॉप-28 (Cop28) की अध्यक्षता कर रहे यूएई और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आयोग (आईईए) (UAE and International Energy Commission (IEA)) ने शुक्रवार को कार्बन उत्सर्जन घटाने पर जोर दिया। कहा, सुसंगत ऊर्जा प्रणाली के जरिए इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। ये पहल संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (United Nations Climate Change Conference) के तहत आयोजित उच्च-स्तरीय वार्ता शृंखला के सारांश का हिस्सा हैं। कॉप-28 के अध्यक्ष सुल्तान अल जाबेर और आईईए के कार्यकारी निदेशक फतीह बिरोल की सह-अध्यक्षता में आयोजित वार्ता में ऊर्जा प्रणाली के रूपांतरण (ट्रांजिशन ऑफ एनर्जी) में तेजी लाने और 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को बनाए रखने का आह्वान किया गया।


2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य
40 से अधिक देशों और 20 संगठनों के मंत्रियों, नीति निर्माताओं और सीईओ ने सम्मेलन में भाग लिया। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, जीवाश्म ईंधन की मांग और आपूर्ति और कार्बन उत्सर्जन में कटौती सहित ऊर्जा प्रणाली के रूपांतरण से जुड़े अन्य प्रमुख तत्वों पर चर्चा की गई है। वार्ता में भाग लेने वाले मोटे तौर पर 2030 तक वैश्विक स्तर पर स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को 3 गुना बढ़ाकर 11,000 गीगावॉट करने और उसी समय सीमा में ‘वार्षिक ऊर्जा दक्षता सुधार’ को दोगुना करने के लक्ष्य पर सहमत हुए हैं।

30 अरब डॉलर फंड की घोषणा
यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने वैश्विक जलवायु समाधान के लिए 30 अरब डॉलर के जलवायु कोष की स्थापना की घोषणा की। उन्होंने कहा, यह फंड जलवायु वित्त अंतर को पाटने के लिए बनाया गया है। वहीं, इटली की पीएम जियोर्जिया मेलोनी ने कहा कि इटली गरीब देशों को जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले ‘नुकसान और क्षति’ से निपटने में मदद के लिए 10 करोड़ यूरो देगा।

गरीब, विकासशील देशों को उचित वित्तीय मदद मिले
कॉप-28 के दौरान जलवायु वित्त में परिवर्तन सत्र में पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक कार्बन बजट में सभी गरीब और विकासशील देशों को उचित हिस्सेदारी देनी होगी। हमें जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी, हानि और क्षति इन सब विषयों पर अधिक संतुलन बनाकर आगे बढ़ने का संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा, भारत नए सामूहिक मात्रात्मक लक्ष्य पर ठोस और वास्तविक प्रगति की उम्मीद करता है।

भारत पेरिस प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रहा : सद्गुरु
शिखर सम्मेलन से पहले ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने कहा कि जलवायु कार्रवाई की दिशा में भारत का नेतृत्व बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि भारत पेरिस समझौते डाटा में अपने वादों को तेजी से पूरा कर रहा है।

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