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देश में गहराया जल संकट, कई बड़े बांधों में पानी आधे से भी कम

May 19, 2026

नई दिल्ली। भीषण गर्मी (Severe heat) के बीच देश में जल संकट गहराता जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission) की ताजा रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। देश के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से घट रहा है और कुल जल भंडारण अब क्षमता के केवल 34.45 प्रतिशत पर पहुंच गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि 13 बड़े जलाशयों में पानी आधे से भी कम बचा है, जबकि कुछ बांध पूरी तरह सूख चुके हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल के अंत तक इन जलाशयों में 71.082 अरब घन मीटर (बीसीएम) पानी था, लेकिन महज दो हफ्तों में इसमें करीब 8 बीसीएम की गिरावट दर्ज की गई। वर्तमान में कुल उपलब्ध जल भंडारण 63.232 बीसीएम रह गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून कमजोर रहा तो आने वाले महीनों में पेयजल, सिंचाई और बिजली उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

दक्षिण भारत में सबसे खराब स्थिति

दक्षिण भारत के कई राज्यों में जलाशयों का स्तर तेजी से गिरा है। तमिलनाडु के वैगई जलाशय में केवल 12.47 प्रतिशत पानी बचा है, जबकि अलियार बांध 21.25 प्रतिशत क्षमता पर पहुंच गया है। केरल के पेरियार बांध में जल स्तर घटकर 41.65 प्रतिशत रह गया है।

कर्नाटक का तट्टिहल्ला जलाशय केवल 26.27 प्रतिशत भरा हुआ है, जबकि तेलंगाना के प्रियदर्शिनी जूराला बांध में 39.49 प्रतिशत पानी शेष है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बढ़ती गर्मी और कम बारिश की वजह से इन क्षेत्रों में स्थिति और खराब हो सकती है।


  • कई बांध पूरी तरह सूखे

    पूर्वी और मध्य भारत में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। बिहार का चंदन डैम, महाराष्ट्र का भीमा उज्जैनी और उत्तर प्रदेश का मौदाहा जलाशय पूरी तरह खाली हो चुके हैं। असम के खांडोंग जलाशय में केवल 17.42 प्रतिशत पानी बचा है।

    मध्य प्रदेश का राजघाट बांध 35.05 प्रतिशत, उत्तराखंड का टिहरी बांध 20.85 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल का कांगसबाती जलाशय 31.50 प्रतिशत स्तर पर पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश का माताटीला बांध भी सामान्य क्षमता के 40.58 प्रतिशत तक सिमट गया है।

    नदी बेसिनों में भी तेजी से घट रहा जल भंडारण

    केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार कई बड़े नदी बेसिनों की स्थिति भी कमजोर हो गई है। गंगा बेसिन में जल भंडारण घटकर 43.34 प्रतिशत रह गया है। गोदावरी बेसिन 36.52 प्रतिशत और नर्मदा बेसिन 34.96 प्रतिशत स्तर पर पहुंच गया है।

    सबसे ज्यादा चिंता कृष्णा बेसिन को लेकर जताई जा रही है, जहां केवल 19.31 प्रतिशत पानी बचा है। वहीं पूर्वोत्तर के बराक बेसिन का जल स्तर 20 प्रतिशत से भी नीचे चला गया है। कावेरी, ब्रह्माणी-बैतरणी और महानदी-पेन्नार क्षेत्र के जलाशय भी सामान्य से कम स्तर पर चल रहे हैं।

    अल-नीनो और मानसून को लेकर बढ़ी चिंता

    मौसम विभाग ने मानसून के समय से पहले पहुंचने के संकेत दिए हैं, लेकिन अल-नीनो का खतरा अभी भी बना हुआ है। अल-नीनो की स्थिति में प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ जाता है, जिसका असर भारतीय मानसून पर पड़ता है और कई बार बारिश सामान्य से कम होती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मई के अंत तक पर्याप्त प्री-मानसून बारिश नहीं हुई तो कई राज्यों में पेयजल संकट गहरा सकता है। साथ ही सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन पर भी भारी दबाव पड़ने की आशंका है।

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