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TMC से बगावत के बाद भी ममता के प्रति नरम पड़े हुमायूं कबीर, बोले- चाहें तो मेरी सीट से जीतकर सदन पहुंच सकती हैं

June 05, 2026

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति (Politics) में एक नया और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) से अलग होकर अपनी राजनीतिक पहचान स्थापित करने वाले आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के संस्थापक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को विधानसभा में वापसी का खुला प्रस्ताव दिया है। कबीर ने कहा है कि यदि ममता बनर्जी चाहें तो वह अपनी रेजीनगर विधानसभा सीट छोड़ने के लिए तैयार हैं और वहां से उनकी जीत सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे।

हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले की नौदा और रेजीनगर दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी। चुनावी नियमों के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को एक सीट बरकरार रखनी होती है, जबकि दूसरी सीट छोड़नी पड़ती है। ऐसे में रेजीनगर सीट पर उपचुनाव की संभावना बन रही है। इसी संदर्भ में कबीर ने ममता बनर्जी को यह राजनीतिक प्रस्ताव दिया है, जिसने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

मीडिया से बातचीत के दौरान कबीर ने कहा कि यदि ममता बनर्जी उनसे संपर्क करती हैं तो वह रेजीनगर से उनके लिए विधानसभा पहुंचने का रास्ता तैयार कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि इस क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार है और स्थानीय राजनीति में उनका प्रभाव निर्णायक माना जाता है। कबीर ने यह भी कहा कि नंदीग्राम जैसी सीट पर चुनाव लड़ना ममता बनर्जी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, जबकि रेजीनगर उनके लिए अधिक सुरक्षित और अनुकूल विकल्प हो सकता है।

यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस चुनावी झटकों और संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है। विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कई नेताओं और विधायकों के अलग रुख अपनाने से राजनीतिक माहौल और अधिक जटिल हो गया है। ऐसे दौर में हुमायूं कबीर की यह पेशकश राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हुमायूं कबीर कभी तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में शामिल रहे हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व के साथ लंबे समय तक चले मतभेदों के बाद उन्हें संगठन से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी का गठन किया और राज्य सरकार तथा तृणमूल नेतृत्व की नीतियों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। चुनाव अभियान के दौरान भी उन्होंने सत्ताधारी दल पर तीखे राजनीतिक हमले किए थे और खुद को एक वैकल्पिक नेतृत्व के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया था।

इसके बावजूद कबीर ने ममता बनर्जी के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन में ममता बनर्जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और वह इस तथ्य को कभी नहीं भूल सकते। उनके अनुसार राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर वह आज भी उनके योगदान को स्वीकार करते हैं। यही कारण है कि मौजूदा परिस्थितियों में वह उनकी मदद के लिए आगे आने को तैयार हैं।

मुर्शिदाबाद क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले कबीर की यह पेशकश केवल एक राजनीतिक बयान नहीं बल्कि बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि रेजीनगर सीट पर उपचुनाव होता है और ममता बनर्जी वहां से चुनाव लड़ने का फैसला करती हैं, तो यह मुकाबला पूरे राज्य की राजनीति का केंद्र बन सकता है।


  • फिलहाल हुमायूं कबीर के इस बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ममता बनर्जी इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती हैं और आने वाले दिनों में राज्य की राजनीतिक दिशा किस ओर बढ़ती है।

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