
जबलपुर। सेठ गोविंद दास विक्टोरिया जिला चिकित्सालय परिसर में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान गंभीर लापरवाही बरतने पर बड़ी कार्रवाई की गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन डॉ. नवीन कोठारी ने निर्माण एजेंसी मेसर्स बाल्मीकि सेल्स उद्योग पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अस्पताल में बेड क्षमता को 275 से बढ़ाकर 500 करने के लिए नए भवन का निर्माण किया जा रहा है। इस कार्य के दौरान निकली मिट्टी, मलबे और कचरे का सही तरीके से निस्तारण नहीं किया गया, जिससे वह नालियों में बहकर चला गया और पूरी सीवर लाइन चोक हो गई। इसके कारण अस्पताल परिसर में जलभराव की स्थिति बन गई है। निर्माण कंपनी द्वारा मलबे के निपटारे की उचित व्यवस्था न किए जाने के कारण अस्पताल की जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो गई है। परिसर में जगह-जगह गंदा और दूषित पानी जमा होने लगा है। इस विकट स्थिति को लेकर अस्पताल में आने वाले कई मरीजों, उनके परिजनों, स्वास्थ्य अधिकारियों और स्टाफ ने प्रबंधन से मौखिक शिकायत की थी। पानी का भराव होने से अस्पताल आने-जाने वाले लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
पूर्व में दी गई चेतावनियों को एजेंसी ने किया नजरअंदाज
अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस समस्या के समाधान के लिए संबंधित निर्माण एजेंसी मेसर्स बाल्मीकि सेल्स उद्योग को पहले भी कई बार पत्र लिखकर और नोटिस देकर सख्त निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद ठेकेदार कंपनी द्वारा इस दिशा में कोई भी ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। लगातार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज करने के कारण ही अंतत: यह दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।
रोगी कल्याण समिति के खाते में जमा होगी जुर्माना राशि
प्रशासनिक आदेश के तहत ठेकेदार कंपनी पर लगाया गया 50 हजार रुपये का यह जुर्माना रोगी कल्याण समिति के बैंक खाते में जमा कराया जाएगा। सिविल सर्जन ने लोक निर्माण विभाग के पीआईयू विंग को भी इस संबंध में एक आधिकारिक पत्र भेजा है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भविष्य में निर्माण कार्य के दौरान इस प्रकार की लापरवाही को बिल्कुल भी सहन नहीं किया जाएगा और स्थिति न सुधरने पर आगे इससे भी अधिक सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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