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इंदौर सहित प्रदेश की 123 जेलों की बाउण्ड्रीवॉल पर दौड़ेगा करंट

May 01, 2026

18 करोड़ खर्च करेगा जेल विभाग इलेक्ट्रिक फेंसिंगपर… अभी 14 जेलों में की कैदियों के ना भाग सकने की पुख्ता व्यवस्था
हल्का झटका कैदी को लगेगा, साथ ही अलार्म सिस्टम भी सक्रिय हो जाएगा

इंदौर। जेल ब्रेक (prison breack) की कुछ घटनाएं प्रदेश (state) में होती रही हैं। कई वर्ष पूर्व भोपाल (Bhopal) की सेंट्रल जेल (Central Jail) से सिमी के 8 कैदी हेड कॉन्स्टेबल की हत्या कर जेल से फरार हो गए थे। उसके बाद से ही सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के कई उपाय किए गए, जिसमें अब इलेक्ट्रिक फेंसिंग भी जेल की बाउण्ड्रीवॉल पर की जा रही है। 18 करोड़ रुपए की राशि जेल विभाग इस पर खर्च कर रहा है, जिसमें प्रदेश की सभी 123 जेलों में यह फेंसिंग लगेगी। इंदौर सहित 14 जेलों में इसका प्रयोग शुरू भी कर दिया है। दीवार फांदकर भागने वाले कैदियों को करंट लगेगा और अलार्म सिस्टम भी एक्टिव हो जाएगा। प्रदेश की जेलों को भी धीरे-धीरे हाईटेक किया जा रहा है। कैदियों की संख्या बढऩे के साथ नई जेलों का निर्माण भी हो रहा है। दूसरी तरफ सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता की जा रही है। यहां तक कि अब वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए ही कैदियों की पेशी अदालतों में करवाने की भी प्रक्रिया शुरू की गई है।


  • इंदौर में ही सेंट्रल जेल लबालब भरी है, तो पिछले कई सालों से सांवेर रोड पर नई जेल का निर्माण भी किया जा रहा है। दूसरी तरफ सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता की जा रही है। यहां तक कि अब वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए ही कैदियों की पेशी अदालतों में करवाने की भी प्रक्रिया शुरू की गई है, ताकि उन्हें जेल से अदालत तक लाने-ले जाने की समस्या भी खत्म हो। दूसरी तरफ सभी जेलों की दीवारों पर इलेक्ट्रिक फेंसिंग पर 18 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा रही है, जिससे दीवार फांदकर कैदियों का फरार होना बंद हो जाएगा। कई वर्ष पूर्व सिमी कैदियों के अलावा अन्य जेलों से भी कैदियों के भागने की घटनाएं होती रहती हैं। अब सभी 123 जेलों में इलेक्ट्रिक फेंसिंग करवाई जा रही है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, सतना सहित 14 जेलों में यह इलेक्ट्रिक फेंसिंग हो भी गई है। शेष 123 जेलों में भी यह सिस्टम शुरू हो जाएगा। वर्तमान में सभी जेलों में 42 हजार से अधिक कैदी बंद हैं। संभवत: पूरे देश में इस तरह का पहला प्रयोग हो रहा है, जब प्रदेश की सभी जेलों को सुरक्षित किया जा रहा है। 11 सेंट्रल जेल प्रदेशभर में मौजूद हैं, जबकि जिला जेल और सबजेल मिलाकर 133 जेल संचालित की जा रही हैं और अधिकांश जेलों में क्षमता से अधिक कैदी मौजूद हैं। पिछले दिनों जेल विभाग ने 18 करोड़ रुपए की राशि वित्त विभाग से मंजूर करवाई और उसके बाद इस राशि का इस्तेमाल सभी जेलों में इलेक्ट्रिक फेंसिंग के लिए शुरू करवाया। इसके लिए एक समिति भी गठित की गई है।

    जेल डीजी वरुण कपूर खुद इस मामले में को देख रहे हैं और उनके निर्देशन में ही इंदौर सहित सभी जेलों में इलेक्ट्रिक तार फेंसिंग लगाने का काम किया जा रहा है। जिन 14 जेलों में यह प्रयोग किया गया, वहां इसे सफल और कारगर भी बताया गया। जेल विभाग का कहना है कि यह फेंसिंग इस तरह लगाई गई है कि बाउण्ड्रीवॉल कूदने-फांदने या उसे नुकसान पहुंचाने पर हल्का झटका कैदी को लगेगा, साथ ही अलार्म सिस्टम भी सक्रिय हो जाएगा, जिससे जेल प्रहरी सतर्क हो जाएंगे और जेल ब्रेक की घटनाएं समाप्त हो जाएंगी। विदेशों में इस तरह की हाईटेक तकनीकों का इस्तेमाल पहले से ही होता रहा है और अब उसी कड़ी में प्रदेश की जेलों को भी सुरक्षित बनाया जा रहा है। हालांकि जेलों के भीतर कई तरह की अनियमितताएं अभी भी है। रसूखदार और पैसा खर्च करने वाले कैदियों को सभी तरह की सुविधाएं जेलों में आसानी से उपलब्ध हो जाती हंै।

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