
जबलपुर। गेहूं खरीदी शुरू हुए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन ज़मीन पर हालात ऐसे हैं मानो व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हो। स्लॉट बुकिंग ठप, सर्वर डाउन और प्रशासनिक सुस्ती के बीच किसान अब खुलकर आक्रोश जताने लगे हैं। खरीदी केंद्रों के बाहर किसानों की भीड़ बढ़ रही है, लेकिन सिस्टम की खामियों ने उनकी मेहनत को रोककर रख दिया है।
सर्वर डाउन बना सबसे बड़ा बहाना
किसानों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से लगातार स्लॉट बुक कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हर बार सर्वर फेल हो जाता है। कई किसान सुबह से शाम तक ऑनलाइन केंद्रों और साइबर कैफे के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ सर्वर डाउन का जवाब मिल रहा है। इससे गुस्साए किसान अब इसे सिर्फ तकनीकी दिक्कत नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन की नाकामी बता रहे हैं।
तैयारी शून्य, किसान पर भारी सिस्टम
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब खरीदी की तारीख पहले से तय थी, तो आखिर तैयारी क्यों नहीं की गई? क्यों सर्वर क्षमता नहीं बढ़ाई गई? क्यों किसानों को इस तरह सिस्टम के भरोसे छोड़ दिया गया? किसानों का आरोप है कि सरकार सिर्फ कागजों में खरीदी की तैयारी दिखाती है, जबकि हकीकत में व्यवस्था पूरी तरह फेल है।
केंद्रों पर आक्रोश, प्रदर्शन की चेतावनी
इस पूरे मामले ने अब प्रदर्शन की स्थिति पैदा कर दी है। कई केंद्रों पर किसान इक_ा होकर विरोध जताने लगे हैं और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द समस्या हल नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
समयसीमा का डर, औने-पौने दाम का खतरा
सबसे ज्यादा चिंता किसानों को समयसीमा को लेकर है। उनका कहना है कि अगर इसी तरह देरी होती रही तो खरीदी की तय तारीख निकल जाएगी और वे अपनी फसल बेच नहीं पाएंगे। मजबूरी में उन्हें औने-पौने दामों पर व्यापारियों को गेहूं बेचना पड़ेगा, जिसका सीधा नुकसान उन्हें उठाना होगा।
खरीदी केंद्रों पर पसरा सन्नाटा
जहां इस समय ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतारें लगनी चाहिए थीं, वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। किसान इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सिस्टम आगे बढऩे का नाम नहीं ले रहा। हर साल बेहतर व्यवस्था के दावे करने वाली सरकार इस बार भी शुरुआती दौर में ही फेल होती नजर आ रही है।
किसानों की दो टूक चेतावनी
किसानों ने साफ कह दिया है कि अगर तत्काल सर्वर समस्या ठीक नहीं की गई और स्लॉट बुकिंग शुरू नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। साथ ही उन्होंने खरीदी की अवधि बढ़ाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
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