
इंदौर। कुुछ समय पूर्व पिपलिया कुमार के सर्वे नम्बर 160/4/10 की लगभग 1 लाख स्क्वेयर फीट जमीन पर बहुमंजिला बिल्डिंग के निर्माण के लिए जो बेसमेंट की खुदाई की गई, उसके चलते बगल वाली बिल्डिंग की बाउण्ड्रीवॉल ध्वस्त हो गई और उसके बाद अभी नर्मदा की लाइन फोड़ दी गई, जिसके चलते निगम ने एक लाख रुपए का जुर्माना बिल्डर फर्म पर ठोंका है, वहीं इस मामले में यह भी जानकारी सामने आई कि गृह निर्माण संस्था की जमीन पर नियमों को ताक में रख अनुमतियां हासिल की गई हैं।
झोन क्रमांक 22, वार्ड 36 में मेसर्स परिमा डेवलपर्स द्वारा बहुमंजिला बिल्डिंग निर्मित की जा रही है। निगम की भवन अनुज्ञा शाखा ने जनवरी माह में बेसमेंट खुदाई में बरती लापरवाही के चलते भी नोटिस थमाया था और अभी कल भी निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर सुरक्षा मानकों का पालन ना करने पर 1 लाख रुपए की चालानी कार्रवाई की गई। भवन अधिकारी देवलासे और निरीक्षक सचिन गेहलोत ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। आसपास के रहवासियों ने भी चल रहे इस अवैध निर्माण की शिकायत की है। इस मामले में एक और तथ्य यह भी सामने आया कि उक्त जमीन सतगुरु गृह निर्माण संस्था की है, जिसकी रजिस्ट्री परिमा डवलपर्स भागीदार निर्मला अरविन्द गोयल के पक्ष में कराई गई और इसमें सहमतिदाता के रूप में भी जनकल्याण गृह निर्माण संस्था शामिल रही, जबकि गृह निर्माण संस्थाओं की जमीनों पर बिना एनओसी अनुमति नहीं दी जा सकती और इस संबंध में तत्कालीन कलेक्टर ने 04-11-2022 को आदेश भी जारी किया है।
मगर इस मामले में सहकारिता विभाग की एनओसी लिए बिना ही परिमा डवलपर्स के कर्ताधर्ताओं ने नगर तथा ग्राम निवेश से अभिन्यास मंजूर करवा लिया और उसके बाद नगर निगम से भी 14.10.2025 को भवन निर्माण की अनुमति प्राप्त कर ली गई। इस संबंध में नगर तथा ग्राम निवेश के संयुक्त संचालक सुभाशीष बनर्जी का कहना है कि इस संबंध में जानकारी ली है और जांच भी की जा रही है। गृह निर्माण संस्था की जमीन पर तथ्यों को छुपाकर मंजूर करवाए अभिन्यास को निरस्त भी किया जा सकता है। वहीं दूसरी तरफ निगमायुक्त ने भी जांच के निर्देश दिए हैं। दरअसल बीते चार सालों में सीलिंग के साथ-साथ संस्थाओं की जमीनों पर प्रशासन द्वारा भी किसी तरह की एनओसी नहीं दी जा रही है।
एक तरफ परिमा डवलपर्स ने तथ्यों को छुपाकर अनुमतियां हासिल की, वहीं बगल में बनी बहुमंजिला बिल्डिंग की बाउण्ड्रीवॉल लापरवाही से खोदे गए बेसमेंट और उसके बाद अब सडक़ के धंसने की आशंका निर्मित हो गई, जिसके चलते रहवासियों ने भी शिकायत दर्ज करवाई है। अग्रिबाण के पास मौजूद दस्तावेजों से पता चलता है कि उक्त जमीन जो कि पटवारी हल्का नम्बर 17 में स्थित रही है और विवादित भी है। यही कारण है कि रजिस्ट्री में सहमतिदाता संस्था का भी उल्लेख किया गया।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved