
इंदौर के चार युवाओं ने बनाई नशे में ड्राइविंग रोकने वाली स्मार्ट डिवाइस
इंदौर, नासेरा मंसूरी।
‘पहले टेस्ट, फिर स्टार्ट…’ (‘First test, then start…’) इसी सोच के साथ इंदौर (Indore) के चार युवाओं (Four youths) ने एक ऐसी डिवाइस (Device) तैयार की है, जो नशे में वाहन चलाने वालों के लिए सख्त दीवार बनकर खड़ी होगी। गाड़ी में फिट होते ही यह डिवाइस ड्राइवर से नशे का टेस्ट मांगेगी। बिना टेस्ट दिए गाड़ी का इंजन स्टार्ट ही नहीं होगा। इंदौर के युवाओं ने इस स्मार्ट तकनीक को ‘सेफइग्नाइट’ (‘SafeIgnite’) नाम दिया है।
नशे में होते हादसों की बढ़ती संख्या देखकर एक दिन सीए कर रहे शहर के ईशान गर्ग ने सोचा कि क्यों न कुछ ऐसा हो कि नशा किया व्यक्ति गाड़ी स्टार्ट ही न कर सके। उन्होंने तीन साल पहले इस पर अपने 3 दोस्तों के साथ मिलकर काम किया और अब इस तरह की डिवाइस बनकर तैयार है कि अगर ये किसी गाड़ी में लगा दी जाए तो गाड़ी तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक कि उसे चलाने वाला टेस्ट नहीं दे देगा, भले ही वो नशे में हो या न हो। टेस्ट देने के बाद जब तक सॉफ्टवेयर ‘हांÓ नहीं कर देगा गाड़ी स्टार्ट ही नहीं होगी। फाउंडर ईशान गर्ग बताते हैं कि यह पूरी तरह से टैंपरप्रूफ और बायप्रूफ है। इस डिवाइस के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। एक हार्डवेयर गाड़ी में इंस्टॉल होता है और हम एक सॉफ्टवेयर देते हैं, जो आपस में कनेक्टेड है। दो से तीन सेकंड का एक छोटा सा टेस्ट होता है और इस टेस्ट को पास करने के बाद ही गाड़ी स्टार्ट होती है। अगर गाड़ी चलाने वाला नशे में पाया जाता है तो गाड़ी का इग्निशन अपने आप लॉक हो जाता है और अलार्म बज जाता है। सबसे खास बात यह है कि डिवाइस गाड़ी चलाने वाले की हर 10 मिनट में फोटो खींचकर सॉफ्टवेयर पर भेजती रहती है, ताकि यह पता चलता रहे कि जिसने टेस्ट दिया है, वही गाड़ी चला रहा है।
ऑन डिमांड टेस्ट ऑप्शन भी
डिवाइस के सॉफ्टवेयर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि मुख्य एक्सेस इस सॉफ्टवेयर से कभी भी ऑन डिमांड टेस्ट कर सकेगा। डिवाइस पर एक कॉल ऑप्शन आएगा, जो गाड़ी के चालक को एक्सेप्ट करके उसी वक्त टेस्ट देना होगा। यानी घर बैठे गाड़ी मालिक कभी भी गाड़ी के चालक का टेस्ट ले सकेंगे।
8 महीने से चल रही थी टेस्टिंग
डिवाइस के तैयार होते ही पिछले 8 महीने से इसका टेस्ट चल रहा था। चारों दोस्त अभी तक भोपाल में कुछ ट्रेवल कंपनी, ट्रक मालिकों, बस मालिकों को इसका डेमो दे चुके हैं। कल इंदौर पुलिस कमिश्नर के सामने भी इसका डेमो हुआ है। टीम बताती है कि इस डिवाइस की डिमांड आना शुरू हो गई है, जिसे हम जल्द ही पूरा करने की स्थिति में होंगे।
3 साल लगातार किया काम
‘सेफइग्नाइटÓ पर 25 साल के ईशान गर्ग, उत्कर्ष सिंह, ऋ तिक गर्ग और अनिकेत बुधवानी ने 2023 में काम शुरू किया था। 3 साल की मेहनत के बाद अब चारों ने भारत की ऐसी अपनी पहली डिवाइस बना दी है और इसका पेटेंट भी फाइल कर दिया है। उनका उद्देश्य यह था कि सफर सुरक्षित हो। हादसा होने के बाद क्यों पता लगे कि हादसा नशे में हुआ है। कुछ ऐसा करना चाहिए कि गाड़ी शुरू होने से पहले ही पता चल जाए।
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