
पटना. नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने बिहार में अपने दो दशक से अधिक समय तक चले मुख्यमंत्रित्व काल पर विराम लगा दिया है. उन्होंने मंगलवार को राज्यपाल सैयद अता हसनैन (Governor Syed Ata Hasnain) को अपना इस्तीफा सौंप दिया. नीतीश ने इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘हमने बिहार के लोगों के लिए बहुत काम किया. इतने दिनों तक हमने लगातार लोगों की सेवा की. हमने तय किया था कि अब मुख्यमंत्री का पद छोड़ देंगे और इसलिए आज मंत्रिमंडल की बैठक के बाद राज्यपाल से मिलकर उन्हें इस्तीफा सौंप दिया. अब नई सरकार यहां का काम देखेगी.’
नीतीश कुमार हाल ही में बिहार से राज्यसभा के लिए चुने गए थे. अब वह दिल्ली में रहेंगे और संसद के उच्च सदन में दिखाई देंगे. इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री (CM) बनने जा रहे हैं. बिहार के इतिहास में यह पहली बार होगा जब राज्य का नेतृत्व बीजेपी का मुख्यमंत्री करेगा. सम्राट चौधरी राज्य में बीजेपी के एक प्रमुख ओबीसी चेहरा हैं और पहले पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं. वह नई कैबिनेट के साथ कल (15 अप्रैल) लोकभवन में सुहब 11 बजे शपथ ग्रहण करेंगे. जेडीयू कोटे से विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव डिप्टी सीएम (Deputy Chief Ministers) पद की शपथ लेंगे. लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.
बीजेपी और एनडीए विधानमंडल दल की बैठक में सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री पद के लिए सम्राट चौधरी के नाम पर मोहर लगी. बीजेपी विधानमंडल दल की बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के साथ वरिष्ठ बीजेपी नेता मंगल पाण्डेय, दिलीप जायसवाल और रेणू देवी ने औपचारिक रूप से सम्राट चौधरी को पार्टी के विधायक दल का नेता प्रस्तावित किया. इस प्रस्ताव को केंद्रीय पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान ने मंजूरी दी. इसके बाद एनडीए विधानमंडल दल की बैठक में नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी का स्वागत किया और सभी सहयोगी दलों ने मुख्यमंत्री पद के लिए उनके नाम का अनुमोदन किया.
सम्राट चौधरी ने पार्टी का जताया आभार
सम्राट चौधरी ने बिहार की जनता की सेवा का अवसर देने के लिए बीजेपी का आभार व्यक्त किया. उन्होंने X पर पोस्ट किया, ‘यह मेरे लिए सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि बिहार की जनता की सेवा करने, उनके विश्वास और सपनों को पूरा करने का एक पवित्र अवसर है. मैं पूर्ण समर्पण, प्रतिबद्धता और ईमानदारी के साथ सभी की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का संकल्प लेता हूं.’
सम्राट चौधरी ने आगे कहा कि वह आने वाले समय में बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए समर्पित भाव से काम करेंगे. उन्होंने X पर लिखा, ‘देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के मार्गदर्शन में मैं बिहार को विकास, सुशासन और समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध रहूंगा. आपका स्नेह, आशीर्वाद और सहयोग ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है.
राज्य में प्रमुख ओबीसी चेहरा हैं चौधरी
तीन दशक से अधिक समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय सम्राट चौधरी को पहला बड़ा राजनीतिक अवसर 1999 में मिला, जब उन्हें आरजेडी की अगुवाई वाली बिहार सरकार में कृषि मंत्री बनाया गया. उन्हें बिहार की राजनीति में एक जमीनी नेता के रूप में जाना जाता है, जिसका उदाहरण 2010 में देखने को मिला, जब जेडीयू की लहर के बावजूद उन्होंने अपनी परबत्ता सीट बरकरार रखी. उसी वर्ष उन्हें आरजेडी ने बिहार विधानसभा में अपना मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनाया.
हालांकि, आरजेडी के साथ सम्राट चौधरी का कार्यकाल 2014 तक ही चला. उन्होंने पार्टी छोड़कर जेडीयू का दामन थाम लिया. जेडीयू में रहते हुए वह बिहार सरकार में शहरी विकास एवं आवास विभाग मंत्री बने. इसके बाद वह 2018 में बीजेपी में शामिल हो गए. उन्हें बीजेपी ने बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया और वह 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए के स्टार प्रचारक भी रहे. इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 74 सीटें जीतीं और राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. साल 2023 में बीजेपी ने सम्राट चौधरी को बिहार प्रदेश अध्यक्ष बनाया.
पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 89 सीटें जीतीं और एक बार फिर राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. सम्राट चौधरी, बिहार के वरिष्ठ नेता शकुनी चौधरी के बेटे हैं, जो जॉर्ज फर्नांडिस की अगुवाई वाली समता पार्टी के संस्थापक सदस्य थे. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कभी समता पार्टी में शामिल थे. एक मजबूत ओबीसी नेता के रूप में सम्राट चौधरी, राज्य में कुशवाहा (कोएरी) समुदाय के वोटों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं. बिहार की कुल आबादी में कुशवाहा और कुर्मी समुदाय का हिस्सा लगभग 7 से 8 प्रतिशत है.
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