नई दिल्ली। जीडीपी (GDP) के आंकड़ों को लेकर शुरू हुई भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) और पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग (Subhash Chandra Garg) की जुबानी जंग अब अदालत तक पहुंच गई है। गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गर्ग के खिलाफ दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में आपराधिक मानहानि का मामला और दिल्ली हाईकोर्ट में दीवानी मानहानि का मुकदमा दायर किया है। हाईकोर्ट में दायर मामले में दो करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है।
इससे पहले ‘अनम्यूट भारत’ पॉडकास्ट में दुबे ने कहा था कि यदि गर्ग अपने आरोपों के लिए माफी नहीं मांगते हैं तो वह कानूनी कार्रवाई करेंगे। अब मामला अदालत में पहुंचने के बाद दुबे ने कहा है कि आगे फैसला अदालत करेगी।
ऐसे शुरू हुआ दोनों के बीच विवाद
दोनों के बीच विवाद की शुरुआत सितंबर में जीडीपी के आंकड़ों को लेकर हुई। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने एक लेख में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही की 7.8 प्रतिशत वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर पर सवाल उठाए थे। उन्होंने वैकल्पिक गणना के आधार पर विकास दर को काफी कम बताते हुए वास्तविक वृद्धि दर को करीब शून्य के आसपास बताया था।
इस पर निशिकांत दुबे ने गर्ग के तर्कों पर सवाल उठाए और उनके पूर्व कार्यकाल को लेकर भी टिप्पणी की। दुबे ने 2018 में प्रधानमंत्री को लिखे अपने एक पत्र का हवाला देते हुए गर्ग की राजकोषीय घाटे से जुड़ी नीतियों पर सवाल उठाए थे। इसके बाद विवाद आर्थिक आंकड़ों से आगे बढ़कर व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया।
सितंबर के मध्य में गर्ग ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में निशिकांत दुबे उनके कार्यालय आए थे और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के अध्यक्ष से जुड़े एक तबादले के मामले में उन पर दबाव बनाने की कोशिश की थी। गर्ग के मुताबिक, उनकी बात नहीं मानने के बाद उनके खिलाफ प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की गई।
गर्ग ने बाद में एक पॉडकास्ट में दुबे के व्यवहार को लेकर गंभीर आरोप लगाए। दुबे ने इन आरोपों को खारिज किया और उन्हें अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया।
दुबे ने भेजा था कानूनी नोटिस
आरोपों के बाद 21 सितंबर को दुबे की ओर से भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के तहत कानूनी नोटिस भेजा गया था। इसमें गर्ग से सात दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने की मांग की गई थी।
गर्ग ने 26 सितंबर को नोटिस का जवाब भेजा। उन्होंने अपने जवाब को सार्वजनिक करते हुए कहा कि उन्होंने जो बातें कही हैं, वे उनके अनुसार तथ्यात्मक हैं और एक लोकसेवक के सार्वजनिक आचरण पर सद्भावना से व्यक्त की गई राय हैं। इसलिए उनके मुताबिक इसे मानहानि नहीं माना जाना चाहिए।
दुबे का दावा- गर्ग से व्यक्तिगत संपर्क नहीं
दुबे ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट और पॉडकास्ट में गर्ग के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने न तो गर्ग से व्यक्तिगत रूप से बात की और न ही फोन पर बातचीत की। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में तत्कालीन प्रधान सचिव के कमरे तक जाने के आरोप से भी इनकार किया।
दुबे ने कहा कि 2014 में केंद्र में सरकार बनने के बाद उन्होंने तय किया था कि वह अपने क्षेत्र से जुड़े काम के अलावा किसी मंत्री से मुलाकात नहीं करेंगे। ऐसे में किसी सचिव से सिफारिश करने का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्होंने वित्त मंत्रालय में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली, पीयूष गोयल या निर्मला सीतारमण से मुलाकात की हो तो उसकी कोई तस्वीर या प्रमाण सामने लाया जाए।
नोटबंदी के बाद बढ़ी तल्खी का दावा
दुबे के मुताबिक, गर्ग के साथ उनकी तल्खी नोटबंदी के बाद बढ़ी। उन्होंने वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए दावा किया कि समिति के तत्कालीन अध्यक्ष वीरप्पा मोइली थे और डॉ. मनमोहन सिंह भी इसके सदस्य थे।
दुबे का आरोप है कि नोटबंदी पर समिति की रिपोर्ट स्वीकार नहीं हो सकी क्योंकि गर्ग ने अलग से एक समानांतर रिपोर्ट तैयार कर दी थी। यह दुबे का दावा है, जिस पर गर्ग का पक्ष अलग हो सकता है।
अब दोनों मामलों में होगी कानूनी प्रक्रिया
फिलहाल विवाद अदालत पहुंच चुका है। दिल्ली हाईकोर्ट में दीवानी मानहानि मामले में दो करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है, जबकि पटियाला हाउस कोर्ट में आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू की गई है। दोनों पक्ष अपने-अपने आरोप और बचाव अदालत के सामने रखेंगे।
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