मुंबई। स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) को लेकर जारी वैचारिक बहस अब अदालत तक पहुंच चुकी है। पुणे की विशेष एमपी/एमएलए अदालत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul) के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि मामले (defamation cases) में सावरकर के प्रपौत्र सत्यकी सावरकर (Satyaki Savarkar) ने गवाही देते हुए कई ऐतिहासिक और विवादित पहलुओं पर खुलकर जवाब दिया।
यह मामला उस भाषण से जुड़ा है, जो राहुल गांधी ने लंदन में दिया था और जिसमें सावरकर को लेकर टिप्पणी की गई थी। इसी को आधार बनाकर सत्यकी सावरकर ने मानहानि का केस दायर किया था।
अदालत में गवाही के दौरान सत्यकी सावरकर ने स्वीकार किया कि सावरकर गाय को भगवान नहीं मानते थे। उनके अनुसार, सावरकर गाय को एक उपयोगी पशु के रूप में देखते थे, न कि धार्मिक प्रतीक के तौर पर।
जिरह के दौरान यह भी सामने आया कि सावरकर ने अंडमान की सेलुलर जेल में सजा के दौरान ब्रिटिश सरकार को पांच बार दया याचिकाएं भेजी थीं।
हालांकि, सत्यकी ने इसका बचाव करते हुए कहा कि उस दौर में कई अन्य राजनीतिक कैदियों ने भी रिहाई के लिए इसी तरह की याचिकाएं दी थीं।
द्वितीय विश्व युद्ध के समय सावरकर द्वारा भारतीयों से ब्रिटिश सेना में शामिल होने की अपील पर भी सवाल उठे।
सत्यकी ने इसे सावरकर की रणनीति बताते हुए कहा कि इसका मकसद युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण दिलाना था, ताकि भविष्य में देश की रक्षा के लिए तैयार बल मौजूद हो।
‘टू नेशन थ्योरी’ को लेकर लगाए गए आरोपों पर सत्यकी ने कहा कि यह अवधारणा सावरकर की नहीं थी। उनके अनुसार, इसका मूल विचार सर सैयद अहमद खान से जुड़ा था और सावरकर ने केवल उस समय की परिस्थितियों पर टिप्पणी की थी।
जब सावरकर की तुलना भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त जैसे क्रांतिकारियों से किए जाने पर सवाल हुआ, तो सत्यकी ने सीधे जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि हर महापुरुष के साथ मतभेद जुड़े होते हैं और राष्ट्रीय सम्मान तय करना सरकार का काम है।
सत्यकी ने यह भी स्पष्ट किया कि सावरकर को ‘स्वातंत्र्यवीर’ की उपाधि किसी सरकारी गजट से नहीं, बल्कि एक लेखक द्वारा सम्मानस्वरूप दी गई थी।
वहीं ‘भारत रत्न’ को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि कौन लोग इसकी मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह जरूर याद दिलाया कि जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को यह सम्मान मिल चुका है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अन्य दक्षिणपंथी संगठनों के साथ सावरकर के वैचारिक संबंधों पर सत्यकी ने कहा कि यह राजनीतिक दलों का आंतरिक विषय है और उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
फिलहाल सत्यकी सावरकर की जिरह पूरी नहीं हुई है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 1 जून तय की है। माना जा रहा है कि यह केस न सिर्फ राहुल गांधी की कानूनी स्थिति तय करेगा, बल्कि सावरकर के विचारों और उनकी ऐतिहासिक भूमिका पर जारी बहस को भी नई दिशा देगा।
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