
मुंबई/दिल्ली । कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सीजेपी नेता अभिजीत दीपके (Congress leader Rahul Gandhi and CJP leader Abhijit Deepke) ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ कब तक खिलवाड़ होता रहेगा (How long will the future of Youth continue to be toyed with) ?
महाराष्ट्र में रविवार, 28 जून को आयोजित होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी-2026) का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा को आनन-फानन में रद्द कर दिया गया । इस बड़ी घटना के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है और विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे देश के युवाओं के भविष्य पर हमला बताया है, तो वहीं कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते हुए सरकार की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह विफल करार दिया है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने राज्य के 1,028 केंद्रों पर इस परीक्षा की तैयारी की थी, जिसमें 4.28 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को शामिल होना था। इससे पहले मई महीने में नीट परीक्षा भी पेपर लीक के कारण रद्द हो चुकी है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा “एक और पेपर लीक. एक और परीक्षा रद्द. इस बार महाराष्ट्र का टीईटी. देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को वसूली का सिस्टम बना दिया गया है, जिससे देश का हर युवा असुरक्षित है। यह सिर्फ पेपर लीक नहीं, यह युवाओं के भविष्य की चोरी है।”
टीईटी पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीजेपी के नेता अभिजीत दीपके ने सरकार पर तीखे प्रहार किए। दीपके ने कहा कि परीक्षा से ठीक एक दिन पहले पेपर रद्द होना यह साबित करता है कि चाहे नेशनल लेवल हो या स्टेट लेवल, बीजेपी की सरकार देश में एक भी परीक्षा सही तरीके से नहीं करवा पा रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इनका ‘डबल इंजन’ अब वास्तव में ‘डबल लीक’ बन चुका है। सीजेपी ने आंकड़े पेश करते हुए आरोप लगाया कि साल 2015 से अब तक देश में 148 पेपर लीक हो चुके हैं, जिससे पिछले 20 साल में 10 करोड़ से ज्यादा छात्रों की जिंदगी बर्बाद हुई है। उन्होंने युवाओं से अपने अधिकारों के लिए आगे आने का आह्वान किया।
महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद द्वारा इस परीक्षा के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई थीं, जो पेपर लीक की भेंट चढ़ गईं। राज्य भर में 1,028 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए थे। परीक्षा के लिए कुल 4,28,122 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इन अभ्यर्थियों में 2,26,363 ऐसे सेवारत शिक्षक भी शामिल थे, जिन्हें इस परीक्षा में बैठना था। लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं (जैसे नीट और अब टीईटी) ने देश की समूची परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
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