नई दिल्ली। भारत को वर्ष 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था (Economy) बनाने के लक्ष्य के लिए भारी निवेश की जरूरत होगी। (C. S. Setty) ने कहा है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को करीब 3,000 से 3,500 लाख करोड़ रुपये के पूंजी निवेश की आवश्यकता पड़ेगी। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए केवल पारंपरिक बैंकिंग फाइनेंसिंग पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि निवेश के नए स्रोतों और वित्तीय ढांचे को मजबूत करना होगा।
2035 तक जुटाने होंगे 650 लाख करोड़ रुपये
एसबीआई चेयरमैन के मुताबिक, “विकसित भारत” मिशन के तहत 2035 तक ही लगभग 600 से 650 लाख करोड़ रुपये की फंडिंग की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और इसके साथ इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग, ऊर्जा और डिजिटल सेक्टर में बड़े निवेश की मांग भी बढ़ेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में घरेलू बचत का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। पहले लोग बैंक जमा को प्राथमिकता देते थे, लेकिन अब निवेशक म्यूचुअल फंड, बीमा और पेंशन योजनाओं की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2015 में केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च जहां करीब 2 लाख करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2027 के बजट में यह बढ़कर 12.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यानी एक दशक में इसमें 600 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के बड़े निवेश से निजी क्षेत्र का भरोसा बढ़ा है। सार्वजनिक निवेश बढ़ने से परियोजनाओं की व्यवहार्यता बेहतर हुई है और निजी कंपनियों की भागीदारी भी तेज हुई है।
बैंकिंग सेक्टर की स्थिति मजबूत
पूर्व वित्त आयोग अध्यक्ष N. K. Singh ने कहा कि भारत का बैंकिंग सेक्टर अब पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है। देश का सकल एनपीए करीब 2.5 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि निजी बैंकों का एनपीए इससे भी कम है।
उन्होंने कहा कि 2008 से 2017 के बीच सामने आई “ट्विन बैलेंस शीट” समस्या अब काफी हद तक नियंत्रण में है। हालांकि, उन्होंने प्राथमिकता क्षेत्र कर्ज नियमों, सीआरआर और एसएलआर जैसे प्रावधानों में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया।
बॉन्ड मार्केट और AI पर जोर
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत को लंबी अवधि की फंडिंग के लिए बॉन्ड मार्केट को और मजबूत बनाना होगा। इसके अलावा बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों के इस्तेमाल से दक्षता बढ़ाने की जरूरत है।
इंफ्रा फाइनेंसिंग के बदल रहे मॉडल
National Investment and Infrastructure Fund (NIIF) और NaBFID जैसी संस्थाएं अब इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में अहम भूमिका निभा रही हैं।
इसके साथ ही InvITs और REITs जैसे मॉडल भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, जिनका उपयोग इंफ्रास्ट्रक्चर परिसंपत्तियों के मोनेटाइजेशन और पूंजी पुनर्चक्रण के लिए किया जा रहा है।
MSME सेक्टर में तेजी
देश में एमएसएमई सेक्टर बैंकिंग लोन का सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र बना हुआ है। दिसंबर 2025 तक इस सेक्टर पर कुल बकाया कर्ज करीब 67 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें सालाना 16 से 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी देश के छोटे और मध्यम उद्योगों में औपचारिक कर्ज की पहुंच 50 प्रतिशत से कम है, जिसे बढ़ाना आने वाले वर्षों में बड़ी चुनौती होगी।
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