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भीषण गर्मी में भारत ने रचा नया बिजली रिकॉर्ड, 260.45 गीगावॉट मांग पूरी; पड़ोसी देशों से 5 गुना ज्यादा लोड संभाला

May 20, 2026

नई दिल्ली। देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच भारत की बिजली खपत नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इसके बावजूद राष्ट्रीय पावर ग्रिड ने मंगलवार को रिकॉर्ड 260.45 गीगावॉट (GW) बिजली मांग को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक यह अब तक की सबसे अधिक पीक पावर डिमांड है, जिसे बिना किसी बड़े व्यवधान के संभाला गया।


  • दो दिन में लगातार टूटा रिकॉर्ड

    ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार मंगलवार शाम 3:40 बजे देश में बिजली की मांग 260.45 GW तक पहुंच गई। इससे एक दिन पहले भी 257.37 GW की रिकॉर्ड मांग पूरी की गई थी। लगातार बढ़ती गर्मी के कारण एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों के इस्तेमाल में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है।

    कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के कारण दिन के समय कूलिंग की जरूरत काफी बढ़ गई है।

    पड़ोसी देशों की कुल मांग से पांच गुना ज्यादा लोड

    ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत की मौजूदा बिजली मांग दक्षिण एशिया के कई देशों की संयुक्त पीक मांग से भी कहीं अधिक है।

    बताया गया कि:

    पाकिस्तान की पीक बिजली मांग करीब 28.3 GW
    बांग्लादेश की 16.5 GW
    श्रीलंका की 3 GW
    नेपाल की 2.2 GW
    भूटान की 1.2 GW
    अफगानिस्तान की 0.8 GW

    इन सभी देशों की कुल संयुक्त मांग करीब 52 GW बैठती है। यानी भारत का राष्ट्रीय ग्रिड अकेले इन देशों की कुल मांग से लगभग पांच गुना ज्यादा बिजली लोड संभाल रहा है।

    सौर ऊर्जा बनी सबसे बड़ा सहारा

    रिकॉर्ड मांग को पूरा करने में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की भूमिका भी काफी अहम रही। मंत्रालय के मुताबिक पीक आवर्स में अकेले सौर ऊर्जा से 56,204 मेगावॉट बिजली मिली, जो कुल उत्पादन का 21 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा था।

    इसके अलावा:

    पनबिजली से 11,422 MW
    पवन ऊर्जा से 4,897 MW
    परमाणु ऊर्जा से 6,293 MW
    गैस आधारित संयंत्रों से 5,205 MW बिजली ग्रिड में शामिल हुई।
    कई स्रोतों के संतुलन से बनी रही ग्रिड स्थिरता

    सरकार के अनुसार देश की बढ़ती बिजली जरूरत को थर्मल, हाइड्रो, गैस, परमाणु, सौर, पवन और स्टोरेज आधारित ऊर्जा स्रोतों के संतुलित मिश्रण से पूरा किया गया। यही वजह रही कि भीषण गर्मी के बावजूद देश के अधिकांश हिस्सों में बिजली आपूर्ति स्थिर बनी रही और राष्ट्रीय ग्रिड पर दबाव के बावजूद सिस्टम विश्वसनीय तरीके से काम करता रहा।

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