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यूरोप से भारत का व्यापार 2500 वर्ष पुराना, ये शहर था मुख्य केंद्र, शोध में खुलासा

नई दिल्‍ली (New Delhi) । इतिहासकार अब तक यह मानते थे कि भारत (India) का रोम (Rome) सहित यूरोप (Europe) से होने वाला व्यापार (Business) लगभग दो हजार साल पुराना है। एतिहासिक तथ्यों के आलोक में वैज्ञानिकों का मानना था कि भारत के केरल के दक्षिणी हिस्से से यूरोप सहित दुनिया के अनेक हिस्सों में 300 से 400 ईसवी के आसपास व्यापार होता था। लेकिन एक नई खोज के अनुसार यह समय कम से कम 500 साल और ज्यादा पुराना हो गया है। नए वैज्ञानिक प्रमाणों ने यह साबित कर दिया है कि केरल के पट्टनम (Pattanam) बंदरगाह और व्यापारिक केंद्र से लगभग 350 ईसा पूर्व मसालों का व्यापार होता था। नई खोज से इतिहास के कई पन्नों को दोबारा लिखने की जरूरत महसूस हो गई है।

कंकालों ने निभाई अहम भूमिका
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के मऊ जिले के वैज्ञानिक डॉ. नीरज राय ने इस खोज में बहुत अहम भूमिका निभाई है। वे इस समय लखनऊ के बीरबल साहनी पुरा विज्ञान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं। डॉ. नीरज राय ने बताया कि उनकी टीम 2016 से ही केरल के एर्नाकुलम जिले के पट्टनम केंद्र पर शोध कर रही थी। इस दौरान उन्हें वहां से लगभग एक दर्जन शवों के कंकाल प्राप्त हुए थे। इन कंकालों के अवशेषों की आधुनिकतम डीएनए तकनीक से विश्लेषण करने से यह पता चला कि इनमें से लगभग नौ नरकंकाल दक्षिण एशियाई, जबकि तीन नरकंकाल यूरोपीय जीन वाले थे।

इन अवशेषों के साथ सामान के भंडारण के उपयोग में आने वाला जार, आभूषण, कांच-पत्थर के मनके, तांबे-लोहे से बनी उद्योग में आने वाली वस्तुएं, मिट्टी के बर्तन, चेरा सिक्के मिले हैं। इसके साथ ही ईट की दीवारें, ईंट से बनाया गया मंच, गोलाकार कुआं, खूंटों के साथ घाट और घाट के नीचे लगभग छह मीटर लंबी लकड़ी की डोंगी (नाव) मिली है। यह साबित करती है कि उस काल में भी विदेशी व्यापारी भारत आते थे और केरल के मसालों का व्यापार कर अपने देश ले जाते थे।

डॉ. नीरज राय ने बताया कि हड्डियों के कुछ अवशेष बहुत जर्जर अवस्था में थे। लेकिन आधुनिकतम डीएनए तकनीकी से पूर्ण शुद्धता के साथ यह प्रमाणित करना संभव हुआ है कि भारत उस समय भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से व्यापार के माध्यम से जुड़ा था। यह शोध स्विटजरलैंड से निकलने वाली अंतरराष्ट्रीय पत्रिका जीन (GENE) में भी प्रकाशित हुई है।


पट्टनम में थी विकसित नगरीय व्यवस्था
शोध में प्रमुख भूमिका निभाने वाले डॉ. कुमरास्वामी थंगराज और डॉ. पीजे चेरियन (पामा इंस्टीट्यूट फॉर द एडवांसमेंट ऑफ ट्रांसडिसिप्लिनरी आर्कियोलोजिकल साइंसेज) ने कहा है कि नई खोज यह स्थापित करती है कि उस समय पट्टनम में एक विकसित नगरीय व्यवस्था विद्यमान थी। यह भी प्रमाणित होता है कि यहां पहले मेगालिथिक लोगों का कब्जा था और बाद में रोमन यहां पर आए। इन विद्वानों का मानना है कि इन लोगों का यहां पर दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर दसवीं शताब्दी तक कब्जा रहा।

सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलीक्यूलर बायोलोजी, हैदराबाद के डॉ. कुमारास्वामी के अनुसार आनुवांशिक विश्लेषण यह साबित करते हैं कि इस काल में यूरोपीय लोगों का यहां खूब आना-जाना रहा। उनके बीच व्यापारिक और सांस्कृितिक संबंध स्थापित हुए।

पट्टनम
भारत के दक्षिणी राज्य केरल के एर्नाकुलम जिले में स्थित पट्टनम प्राचीन काल से बंदरगाह के प्रसिद्ध केंद्र के रूप में जाना जाता था। यहां से रोम के साथ-साथ दुनिया के अनेक देशों तक व्यापार होता था। इस केंद्र ने भारत को व्यापार और संस्कृति के माध्यम से पूरी दुनिया को भारत से जोड़ा। अब तक की जानकारी तमिल, संस्कृत, ग्रीक और रोमन भाषाओं में लिखे गए ग्रंधों में प्राप्त जानकारी के आधार पर थी।

लेकिन नई खोज यह प्रमाणित करती है कि भारत ईसा पूर्व में भी व्यापार में बहुत उन्नत केंद्र के रूप में दुनिया में जाना जाता था। यह इंग्लैंड, फ्रांस और पुर्तगाली विद्वानों की उस थ्योरी के पूरी तरह उलट है जिनका यह दावा रहा था कि उनके आने के बाद से ही भारत ने दुनिया के साथ व्यापार करना सीखा। इस अर्थ में यह खोज बहुत महत्त्वपूर्ण है।

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