
नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) ने बुधवार को स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एमसीए) परियोजना के लिए अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) जारी कर दिया है। यह प्रस्ताव तीन शॉर्टलिस्ट किए गए बोलीदाताओं को भेजा गया है, जिनमें लार्सन एंड टुब्रो-भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और भारत फोर्ज-बीईएमएल शामिल हैं। रक्षा अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
एएमसीए कार्यक्रम को भारत की सबसे महत्वाकांक्षी लड़ाकू विमान परियोजना माना जा रहा है, जिसके 2030 के मध्य से भारतीय वायुसेना की युद्ध क्षमता की रीढ़ बनने की उम्मीद है। यह एक दो इंजन वाला स्टील्थ लड़ाकू विमान होगा, जिसमें उन्नत सेंसर प्रणाली, अंदरूनी हथियार रखने की सुविधा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक और नेटवर्क से जुड़ी युद्ध क्षमता जैसे आधुनिक फीचर्स होंगे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 15 मई को श्री सत्य साईं जिले में 16 हजार करोड़ रुपये की एएमीए इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना की आधारशिला रखी। इसे भारत के रक्षा इतिहास का ‘ऐतिहासिक अध्याय’ बताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा था कि यह पहल आंध्र प्रदेश के लिए एक नए युग की शुरुआत करेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आठ ड्रोन कंपनियां कुरनूल में ड्रोन सिटी स्थापित करने में मदद करेंगी।
क्या है छठी पीढ़ी के जेट की जरूरत?
इस साल मार्च में ससंद की रक्षा समिति ने कहा था कि आधुनिक युद्ध में तेजी से बदलाव हो रहा है और उन्नत लड़ाकू विमानों की जरूरत बढ़ रही है। चीन भी अपने छठी पीढ़ी के विमान पर काम कर रहा है और उसने इसके कुछ वीडियो भी जारी किए हैं। इसके अलावा, चीन अपने पांचवीं पीढ़ी के विमान पाकिस्तान के साथ साझा करने की तैयारी में है, जिससे भारत के लिए यह चुनौती और बढ़ जाती है।
भारत की अपनी परियोजना कहां तक पहुंची?
रक्षा समिति के अनुसार, भारत अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (एएमसीए) निर्माण पर भी काम कर रहा है। इसका डिजाइन तैयार हो चुका है। भारतीय वायुसेना की योजना 2035 तक ऐसे छह स्क्वाड्रन शामिल करने की है, जिससे देश की हवाई ताकत में बड़ा इजाफा होगा।
इंजन और तकनीक में क्या हो रही है तैयारी?
भारत ने एक फ्रांसीसी कंपनी के साथ मिलकर 110-120 केएन क्षमता का शक्तिशाली इंजन विकसित करने का फैसला किया है। यही इंजन भविष्य के स्वदेशी लड़ाकू विमानों में लगाया जाएगा। इस कदम से भारत की रक्षा तकनीक आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगी और विदेश पर निर्भरता कम होगी।
किन देशों के पास पहले से हैं 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान?
1. अमेरिका: मौजूदा समय में सिर्फ तीन देशों के पास पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की मौजूदगी बताई जाती है। इनमें सबसे आगे अमेरिका है, जिसके पास लॉकहीड मार्टिन कंपनी के एफ-22 रैप्टर और एफ-35 लाइटनिंग-II एयरक्राफ्ट मौजूद हैं। अमेरिका ने अपने एफ-35 को कई देशों को मुहैया कराया है। इस्राइल से लेकर ऑस्ट्रेलिया और इटली से लेकर जापान तक अमेरिका से इस लड़ाकू विमान को खरीद चुके हैं। हालांकि, अमेरिका ने अपने एफ-22 रैप्टर को किसी भी देश को बेचने पर रोक लगाई है।
2. चीन: पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की कैटेगरी में चीन अपने पास दो फाइटर जेट्स होने का दावा करता है। इनमें से एक चेंगदू का जे-20 और दूसरा चेंगदू का ही जे-35 है। हालांकि, इनकी क्षमताओं को लेकर ज्यादा जानकारियां सामने नहीं आई है। बताया जाता है कि जे-20 के हाई-स्पीड ट्रायल 2011 में शुरू कर दिए गए थे। हालांकि, इसे चीन की वायुसेना में मार्च 2017 में शामिल किया गया। वहीं, जे-35 फाइटर जेट कार्यक्रम 2007 से ही जारी है। इसे 2024 के एयरशो में दुनिया के सामने पेश किया गया। हालांकि, इसके परीक्षण अभी कसौटी पर खरे नहीं उतरे हैं।
3. रूस: अभी रूस के पास सिर्फ एक एसयू-57 एयरक्राफ्ट ही पांचवीं पीढ़ी का है। इसकी पहली उड़ान 2010 में दर्ज हुई थी। रूसी वायुसेना को 2020 में इस फाइटर जेट की डिलीवरी भी मिली थी। हालांकि, इसकी क्षमताओं का पूरी तरह दुनिया के सामने आना अभी बाकी है।
अमेरिका की तरफ से एफ-35 की डिलीवरी के बाद उसके कई सहयोगियों को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान मिले हैं। हालांकि, कुछ और देश अपने पांचवीं पीढ़ी के मॉडल बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इन देशों में तुर्किये, दक्षिण कोरिया, जापान, स्वीडन और भारत शामिल हैं। इन सभी देशों में पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स का विकास कार्यक्रम अलग-अलग चरणों में है।
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