
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका की सेनाएं संयुक्त सैन्य अभ्यास युद्ध अभ्यास 2026 के दौरान आधुनिक युद्ध की चुनौतियों और नई सैन्य तकनीकों पर अपने अनुभव साझा कर रही हैं. उत्तराखंड के औली में दोनों देशों की सेनाओं के बीच कमांड पोस्ट एक्सरसाइज (CPX), एक्सपर्ट की चर्चा और सैन्य तकनीक से जुड़े अनुभव को साझा किया गया.
इस दौरान मल्टी डोमेन वॉरफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, साइबर ऑपरेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे अहम विषयों पर चर्चा हो रही है. इसका मकसद चुनौतीपूर्ण युद्ध परिस्थितियों में दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और साझा समझ विकसित करना है.
औली में आयोजित विशेषज्ञों की चर्चा में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि GPS बाधित होने या दुश्मन की ओर से इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर किए जाने की स्थिति में सैनिक किस तरह ऑपरेशन जारी रख सकते हैं. इसके अलावा AI की मदद से खुफिया जानकारी का विश्लेषण, दुश्मन के ड्रोन को रोकने की तकनीक यानी काउंटर-ड्रोन सिस्टम और साइबर क्षमताओं के इस्तेमाल पर भी चर्चा की जा रही है.
अभ्यास के दौरान दोनों सेनाएं यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि संचार व्यवस्था बाधित होने, ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल और इलेक्ट्रॉनिक हमलों के बीच सैन्य ऑपरेशन को प्रभावी तरीके से कैसे अंजाम दिया जा सकता है.
औली में दोनों सेनाओं के विशेषज्ञ हाई एल्टीट्यूड यानी अधिक ऊंचाई वाले इलाकों और बेहद ठंडे मौसम में ऑपरेशन करने के अनुभव भी साझा कर रहे . इसमें ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैनिकों को मेडिकल सहायता देना, सैन्य विमानों और हेलीकॉप्टरों का प्रभावी इस्तेमाल, मोर्टार और स्नाइपर की तैनाती जैसे विषय शामिल हैं. इसके साथ ही साइबर ऑपरेशन, मनोवैज्ञानिक अभियान और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के जरिए सूचना आधारित ऑपरेशन करने के तरीकों पर भी चर्चा हो रही है.
कमांड पोस्ट एक्सरसाइज के दौरान दोनों देशों के सैन्य कमांडर और स्टाफ अधिकारी काल्पनिक युद्ध परिस्थितियों में संयुक्त योजना बनाने, फैसले लेने और ऑपरेशन के समन्वय का अभ्यास कर रहे हैं. इसका उद्देश्य पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी इलाकों में संयुक्त सैन्य अभियानों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने की क्षमता को बेहतर करना है.
संयुक्त सैन्य अभ्यास युद्ध अभ्यास 2026 का 22वां संस्करण 15 सितंबर को उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में शुरू हुआ. इसमें भारतीय सेना और अमेरिकी सेना के 600-600 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं. अभ्यास में पैदल सेना आधारित ऑपरेशन, इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG), संयुक्त सैन्य क्षमता और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है.
सामरिक दृष्टि से, औली में हो रही यह चर्चा सिर्फ सैन्य अभ्यास तक सीमित नहीं है. इसके जरिए दोनों सेनाओं को पहाड़ी युद्ध, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, ड्रोन और AI जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने के अनुभव साझा करने का मौका मिल रहा है. इससे आपसी तालमेल, सैन्य प्रक्रियाओं की समझ और पेशेवर सहयोग को मजबूत करने में मदद मिलेगी.
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