
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विस्थापित करने की बनाई थी योजना, हालांकि अमलतास और गुलमोहर के फ्लैटधारकों ने भी शिफ्टिंग का किया था विरोध
इंदौर। एमआर-11 (MR-11) के निर्माण में जहां रसूखदारों ने हाईकोर्ट (High Court) से स्टे (Stay) ले लिया तो एक बस्ती की बाधा भी कायम है। पिछले दिनों प्राधिकरण (Authority) ने निर्णय लिया कि इन बस्ती के रहवासियों को योजना 136 (Scheme 136) में निर्मित अमलतास और गुलमोहर परिसर की बहुमंजिला इमारतों में खाली पड़े फ्लैटों में शिफ्ट कर दिया जाए। हालांकि इसका तीखा विरोध यहां के फ्लैटधारकों ने किया और प्राधिकरण दफ्तर में भी विरोध प्रदर्शन करने रहवासी पहुंचे तो अब केंद्र सरकार ने पीएम आवास योजना का लाभ इन दोनों परिसरों में देने से इनकार कर दिया।
शासन ने हालांकि नगर निगम की तरह प्राधिकरण को भी यह अधिकार दिए कि पीएम आवास योजना के तहत फ्लैटों का निर्माण करे, ताकि अपनी योजनाओं, मास्टर प्लान की सडक़ों, फ्लायओवरों के साथ-साथ मेजर रोड, यानी एमआर के निर्माण में बाधक रहवासियों को शिफ्ट कर सके। अभी प्राधिकरण के सामने एमआर-11 के साथ एमआर-12 में बाधक बस्तियों को शिफ्ट करने की चुनौती है। हालांकि प्राधिकरण बोर्ड ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बहुमंजिला इमारत निर्मित करने का निर्णय ले लिया है, क्योंकि इसमें समय लगेगा और इसके पहले एमआर-11 और 12 का निर्माण सिंहस्थ के मद्देनजर जरूरी है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि ने भी यह मांग रखी कि पहले बस्ती के लोगों को विस्थापित किया जाए, उसके बाद इन्हेंहटाएं। लिहाजा एमआर-11 का निर्माण अधूरा पड़ा है, जिसे पूरा करने के लिए आईडीए ने तय किया कि यहां के 227 परिवारों को अमलतास और गुलमोहर परिसर में शिफ्ट किया जाए। यहां के फ्लैटों की कीमत वैसे तो 15-16 लाख रुपए है, मगर प्राधिकरण 6 लाख रुपए में देने को तैयार था, जिसमें 4 लाख की राशि पीएम आवास योजना के तहत मिलती और 2 लाख रुपए की राशि प्रति विस्थापित परिवार से ली जाना थी। शेष 10 लाख की राशि प्राधिकरण अपनी अन्य योजना से प्रतिपूर्ति करता, लेकिन केंद्र सरकार ने प्राधिकरण को योजना 136 के अमलतास और गुलमोहर के निर्मित फ्लैटों में योजना का लाभ देने से इनकार कर दिया है, जिसके चलते अब 227 परिवारों की शिफ्टिंग खटाई में पड़ गई, क्योंकि पीएम आवास योजना का लाभ न मिलने के कारण अब 4 लाख रुपए की प्रतिपूर्ति प्राधिकरण कैसे करेगा? लिहाजा अब अन्य वैकल्पिक उपाय तलाशे जा रहे हैं। दूसरी तरफ यहां जो परिवार रह रहे हैं, उन्होंने भी इस बात का कड़ा विरोध किया था कि इन विस्थापितों को बसाया गया तो उनका रहना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि अब उन रहवासियों को भी केंद्र से मंजूरी न मिलने के चलते बड़ी राहत मिली, क्योंकि अब प्राधिकरण अमलतास और गुलमोहर की बहुमंजिला इमारतों में इन परिवारों को शिफ्ट नहीं कर पाएगा।
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