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इंदौर: तीन पहिया वाहनों पर बैन के बावजूद चोइथराम मंडी में रोजाना 7000 से ज्यादा वाहनों का आवागमन

June 01, 2026

व्यवस्थाओं में सुधार, लेकिन कर्मचारियों और व्यापारियों में आपसी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी

इंदौर। प्रदेश (State) की सबसे बड़ी देवी अहिल्याबाई फल एवं सब्जी मंडी (Choithram Mandi) में यातायात (transportation) को पटरी पर लाने के लिए किए गए कड़े फैसलों के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। मंडी में बार-बार लगने वाले भीषण जाम से मुक्ति दिलाने के लिए मई की शुरुआत में तीन पहिया (three-wheelers) वाहनों और टैक्सियों के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया था। इस फैसले को एक महीना पूरा हो चुका है और वर्तमान में किसान व व्यापारी यातायात व्यवस्था से काफी हद तक संतुष्ट नजर आ रहे हैं। हालांकि व्यवस्था सुधरने के बाद भी मंडी प्रशासन के कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों के बीच अंदरूनी खींचतान और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।



  • चोइथराम मंडी में रोजाना छोटे-बड़े 7000 से अधिक वाहनों की आवाजाही होती है, जिसके चलते यहां जाम लगना एक आम समस्या बन चुका था। इस विकराल समस्या को देखते हुए मंडी सचिव ओपी खोड़े ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए तीन पहिया वाहनों पर प्रतिबंध लगाया। इस निर्णय के बाद से मंडी परिसर के भीतर जाम से तो राहत मिल गई है, लेकिन प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस अंदरूनी असंतोष और गुटबाजी को खत्म कर एक पारदर्शी माहौल बनाने की है।

    अंदरूनी खींचतान से परेशान किसान और व्यापारी
    यातायात की समस्या हल होने के बावजूद मंडी के प्रवेश नाकों और आंतरिक व्यवस्थाओं में तैनात कर्मचारियों के बीच गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है। चौकीदार से लेकर उपनिरीक्षक स्तर तक के कर्मचारी एक-दूसरे पर लापरवाही के आरोप लगा रहे हैं। सुरक्षा और व्यवस्था में लगे कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें जो प्रमुख स्थान तय कर दिए गए हैं, वे वहीं तैनात रहकर मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। वहीं कुछ व्यापारिक संगठनों का आरोप है कि कर्मचारी जमीनी स्तर की व्यावहारिक समस्याओं पर ध्यान नहीं देते। उधर, दूरदराज से आने वाले किसानों का कहना है कि वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि उनकी फसल की नीलामी और तौल बिना किसी परेशानी और रुकावट के आसानी से हो जाए।

    चौकीदारों का दबदबा और पूर्व प्रभारी कुवाल की चर्चा
    मंडी के गलियारों में चर्चा है कि यहां सालों से जमे कुछ चौकीदार और निचले स्तर के कर्मचारियों का दबदबा आज भी कायम है, जिससे किसान और व्यापारी दोनों हैरान हैं। इस बीच मंडी के पूर्व प्रभारी राज कुवाल के कार्यकाल को भी याद किया जा रहा है। कुवाल ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए कई कड़े और साहसिक प्रयास किए थे, लेकिन तब आपसी विरोधाभास और अंदरूनी राजनीति के चलते उन्हें पद से हटना पड़ा था।

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