
जबलपुर। जिले की मझौली तहसील स्थित सेवा सहकारी समिति खाड़ के उपार्जन केंद्र क्रमांक 1 और 3 में बड़े पैमाने पर फर्जी धान खरीदी का खुलासा हुआ है। समिति के अधिकृत ऑपरेटर श्रीराम राय की आईडी और पासवर्ड को निजी ऑपरेटर आकाश साहू ने चुपके से देख लिया। इसके बाद मझौली के व्यापारी नरेंद्र गुप्ता के साथ मिलीभगत करके 9 और 10 जनवरी 2025 को लगभग 40 किसानों के नाम पर 4615 क्विंटल धान की फर्जी ऑनलाइन एंट्री दर्ज कर दी गई। पोर्टल पर धान दर्ज होते ही संबंधित खातों में 1 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान भी जारी हो गया, जबकि यह अनाज वेयरहाउस तक कभी पहुंचा ही नहीं। समिति प्रबंधक ने पूरे मामले के साक्ष्य, कॉल रिकॉर्डिंग और व्हाट्सएप चैट के साथ जबलपुर कलेक्टर, सिहोरा एसडीएम और सहकारिता विभाग को लिखित शिकायत सौंपी है, जिसमें कुल 6068 क्विंटल धान की कमी सामने आने की बात कही गई है।
ऑडियो रिकॉर्डिंग से सामने आई सौदेबाजी की सच्चाई
इस पूरे खेल का पर्दाफाश व्यापारी और ऑपरेटर के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत की रिकॉर्डिंग से हुआ है। बातचीत में पोर्टल पर फर्जी नाम जोडऩे, रकबा चढ़ाने और कमीशन बांटने के स्पष्ट संकेत मिले हैं। सोशल मीडिया और विभागीय स्तर पर ऑडियो सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। किसान संगठनों का कहना है कि वास्तविक किसानों के हक पर डाका डालकर बिचौलिए मालामाल हो रहे हैं। वेयरहाउस में माल की आवक और उपार्जन केंद्र से जारी पावती के मिलान में 6068 क्विंटल का बड़ा अंतर प्रमाणित हो चुका है। सहकारिता विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की जा रही है कि पूरे रिकॉर्ड को सील कर संबंधित व्यापारी, दोनों ऑपरेटरों और मौन साधे जिम्मेदार अफसरों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।
मिलीभगत और सांठगांठ से चालीस किसानों के नाम का किया गया दुरुपयोग
उपार्जन केंद्र पर धान की वास्तविक आवक किए बिना ही पोर्टल पर स्टॉक दर्शाने का यह खेल सोची-समझी साजिश के तहत रचा गया। व्यापारी नरेंद्र गुप्ता ने समिति के आंतरिक सिस्टम में सेंध लगाने के लिए ऑपरेटर आकाश साहू का सहारा लिया। श्रीराम राय जब कंप्यूटर पर विभागीय कार्य निपटा रहे थे, उसी दौरान पासवर्ड हासिल किया गया। इसके बाद लगभग 40 ऐसे किसानों के पंजीयन नंबर निकाले गए, जिन्हें इस सौदे की भनक तक नहीं थी। इन खातों पर कुल 4817 क्विंटल तक की संभावित फर्जी प्रविष्टियां चढ़ाकर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का आहरण करा लिया गया। भौतिक सत्यापन में वेयरहाउस के भीतर इस दर्ज स्टॉक की एक भी बोरी मौजूद नहीं पाई गई, जिससे पूरे उपार्जन तंत्र की निगरानी व्यवस्था कटघरे में आ गई है।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे गंभीर सवाल
बृहताकार सेवा सहकारी समिति खाड़ में हुए इस वित्तीय घोटाले की गूंज प्रशासनिक गलियारों में सुनाई दे रही है, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार बेहद सुस्त है। समिति प्रबंधन की ओर से सिहोरा एसडीएम को लगभग 2 माह पहले लिखित शिकायत और डिजिटल साक्ष्य सौंपे गए थे। इसके बावजूद अब तक अधिकृत जांच दल मौके पर नहीं पहुंचा है। विभाग के पास समिति के लॉगिन विवरण, आईपी एड्रेस और पोर्टल टाइमिंग की तकनीकी जानकारी उपलब्ध होने के बाद भी ऑपरेटर और बिचौलिए पर शिकंजा नहीं कसा गया है। पूर्व में भी समिति के तत्कालीन प्रबंधन और प्रभारी पर एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। अब दोबारा नई शिकायत आने पर स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं।
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