
इंदौर। इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में एक बुज़ुर्ग किसान के घर पर पुलिस की रात करीब 12 बजे अचानक दबिश देने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इंदौर के ही नंद बाग इलाके में एक जमीन को लेकर बुजुर्ग और प्रॉपर्टी ब्रोकरों के बीच में विवाद चल रहा है। इस मामले में एक याचिका इंदौर हाई कोर्ट में भी दायर की गई हैबुजुर्ग ने थाना प्रभारी सहित जांच अधिकारी पर कई गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
दरअसल बाणगंगा क्षेत्र के निवासी जसराज मेहता के घर देर रात पुलिस कर्मियों ने दस्तक दी और उस पर नंद बाग क्षेत्र की जमीन को लेकर समझौते के लिए दबाव बनाने की कोशिश की, जबकि पुलिसकर्मी कोई स्पष्ट वैधानिक आदेश लेकर नहीं आए थे। इस मामले में क्षेत्र के कुछ बिल्डरों ने जसराज मेहता के खिलाफ बाणगंगा थाने में करीब 1 महीने पहले शिकायती आवेदन दिया था।। इस मामले में जसराज मेहता के वकील अजय मिश्रा का कहना है कि जसराज मेहता इस पूरे ही मामले में अपने बयान दर्ज करने के लिए तीन बार बाणगंगा थाने पहुंचे थे, लेकिन थाने पर ना तो उनके बयान दर्ज किए गए और ना ही जमीन कब्जे का कोई वैधानिक दस्तावेज़ बताया गया और तीनों बार उनके बयान दर्ज नहीं किए गए बल्कि थाना प्रभारी सियाराम गुर्जर और जांच अधिकारी इंदर सिंह जसराज पर बिल्डरों से समझौता करने और 70 प्लाटों का पैसा उन्हें लौटने का दबाव बनाते रहे। जब उन्होंने अपने नाम से किसी जमीन पर कब्जा करने और 70 प्लाटों को न बेचने का हवाला दिया तो देर रात पुलिस ने उनके घर पर दबिश देकर समझौते के लिए दबाव बनाया। इस मामले में जसराज मेहता ने पहले ही इंदौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की हुई है जिस पर सुनवाई होना शेष है।
वहीं इस मामले में बाणगंगा थाना क्षेत्र के एडिशनल डीसीपी रामसनेही मिश्रा का कहना है कि देर रात पुलिसकर्मियों द्वारा जसराज मेहता के घर पहुंचकर जांच किए जाने की बात सामने आई है जसराज मेहता के खिलाफ बाणगंगा थाने में शिकायती आवेदन दिया गया है जिस पर जांच की जा रही है। यह पुलिस कार्यप्रणाली का एक हिस्सा है, यदि व्यक्ति जवाब देने या बात करने नहीं पहुंचता है तो उसकी तलाशी के लिए पुलिस देर रात भी दबी देती है किसी प्रकार का समझौता या दबाव बनाने जाने की बात पर उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्च अधिकारियों के निर्देश पर जांच की जाएगी।
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