
अग्निबाण की आशंका सही निकली… मास्टर प्लान सड़कों के साथ नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा मंजूर अभिन्यासों पर भी लटकी कानूनी तलवार, निगम की तोड़फोड़ के खिलाफ लगी हंै कई याचिकाएं
इंदौर, राजेश ज्वेल
अग्निबाण ने लगातार मास्टर प्लान (master plan) की सड़कों (Roads) की चौड़ाई (widths ) घटाने-बढ़ाने के साथ यह भी खुलासा किया था कि इंदौर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अपने 17 पेज के फैसले में कहा कि इंदौर का मास्टर प्लान 31 मार्च 2021 को ही समाप्त हो गया है, जिसके चलते सड़कों के साथ-साथ नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा मंजूर अभिन्यास सहित प्राधिकरण की टीपीएस योजनाएं और अन्य प्रोजेक्ट झमेले में पड़ सकते हैं। यह आशंका सड़कों के मामले में तो फिलहाल सही साबित हुई। अभी दो दिन पहले हाईकोर्ट ने छावनी रोड की चौड़ाई 80 फीट निर्धारित करने और उसके मुताबिक तोड़फोड़ के लिए जारी नोटिसों के मामले में जहां अंतरिम राहत दी, साथ ही यह भी कहा कि इंदौर का मास्टर प्लान वर्तमान में अस्तित्व में नहीं है, जैसा कि सिंगल सिंगल बेंच ने आदेश दिया है, तो फिर
सड़कों की चौड़ाई किस आधार पर निर्धारित की गई है और यह व्यापक बहस का विषय भी है। लिहाजा 14 मई को इसकी सुनवाई करेंगे।
अभी नगर निगम इंदौर के मास्टर प्लान में जिन सड़कों की चौड़ाई निर्धारित है, उसी के मुताबिक 23 सड़कों का निर्माण केन्द्र से मिले 468 करोड़ की राशि से कर रहा है। हालांकि जनप्रतिनिधियों और रहवासी-दुकानदारों के दबाव-प्रभाव के चलते आधा दर्जन से अधिक सड़कों की चौड़ाई 20-20 फीट तक घटाने का निर्णय भी ले लिया, जिसमें छावनी की सड़क भी शामिल है, जिसकी मास्टर प्लान में चौड़ाई 80 फीट निर्धारित है और निगम ने अपने स्तर पर इसे 60 फीट बनाने का निर्णय लिया। मगर इतनी चौड़ाई में भी कई मकान-दुकान चपेट में आ रहे हैं। दो महीने पूर्व छावनी में नगर निगम द्वारा जो नोटिस जारी किए गए थे उसे हाईकोर्ट ने निरस्त करते हुए निगम को निर्देश दिए कि वह इस मामले की पुन: सुनवाई कर विधि सम्मत आदेश पारित करे। चूंकि निगम अपने नोटिसों और मास्टर प्लान में निर्धारित चौड़ाई के चलते इस मामले में कोई निर्णय नहीं ले सकता था, लिहाजा उसने अपनी कार्रवाई जारी रखी, जिसके चलते हाईकोर्ट में जहां कई याचिकाएं सड़क चौड़ाई और मास्टर प्लान की वैधता को लेकर दायर की गई है। वहीं अभी दो दिन पहले तीन याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत दी, जिसमें एमएमबी होटल प्रा.लि. मैनेजिंग डायरेक्टर गिरिराज गुप्ता विरुद्ध इंदौर निगम और अन्य मामलों में सिंगल बेंच ने स्पष्ट कहा कि जब याचिका नम्बर 4687/2025 राज बिसानी विरुद्ध अन्य और प्रदेश शासन के मामले में 5 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया है कि इंदौर का मास्टर प्लान 31 मार्च 2021 को ही समाप्त हो चुका है और वर्तमान में उसका कोई अस्तित्व नहीं है। लिहाजा ऐसी स्थिति में रोड की चौड़ाई किस आधार पर तय की जा सकती है और यह मामला बहस का विषय है, जिस पर 14 मई को सुनवाई की जाएगी। उक्त आदेश न्यायमूर्ति विनय सराफ ने दिया है और इसी तरह की दो अन्य याचिकाओं में भी यही निर्णय लिया गया। दरअसल, छावनी सहित अन्य सड़कों के निर्माण के लिए नगर निगम ने जो नोटिस जारी किए और तोड़फोड़ शुरू करवाई उसका विरोध रहवासियों-दुकानदारों द्वारा तो किया ही जा रहा है, वहीं क्षेत्रीय विधायक, पार्षद सहित अन्य भी चौड़ाई घटाने को सहमत हो गए। मगर इसी बीच दूसरा वैधानिक संकट इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर खड़ा हो गया, क्योंकि 1 जनवरी 2008 से लागू किए गए इंदौर के मास्टर प्लान को हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश के जरिए 31 मार्च 2021 को समाप्त बता दिया। हालांकि जब तक नया मास्टर प्लान अमल में नहीं आ जाता तब तक पुराना प्लान ही लागू रहता है और विगत कई वर्षों से यह प्रक्रिया जारी है। भोपाल सहित कई जगह के मास्टर प्लान तो पिछले कई सालों से लागू ही नहीं हो पाए। अब चूंकि सड़कों की चौड़ाई के मामले में हाईकोर्ट के इस आदेश को आधार बनाया जा रहा है, ऐसे में संभव है कि नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा 31 मार्च 2021 के बाद जितने भी अभिन्यास मंजूर किए हैं, उन पर भी कानूनी तलवार लटक सकती है। फिलहाल तो चंदन नगर सहित कई सड़कों को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर हो गई हैं, जिसमें सिंगल बेंच के आदेश का हवाला देकर निगम नोटिसों को चुनौती दी गई है कि जब वर्तमान में मास्टर प्लान ही लागू नहीं है तो फिर किस आधार पर सड़कों की चौड़ाई तय कर तोड़फोड़ करवाई जा रही है। अब इसका अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।
80 फीट के आधार पर दिए नोटिसों को भी कोर्ट ने किया था निरस्त
नगर निगम ने नेहरू प्रतिमा, मधुमिलन चौराहा से छावनी पुल तक मास्टर प्लान की सड़क को लेकर कई नोटिस जारी किए थे। झोन क्रमांक 11 के भवन अधिकारी द्वारा दिए गए इन नोटिसों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिसमें कहा गया कि संबंधित मकान-दुकान निगम के ही मंजूर नक्शे के मुताबिक बनाए गए हैं और इन्हें अब हटाने की कार्रवाई विधि सम्मत नहीं है, क्योंकि निगम ने ही 2014 में सड़क कीचौड़ाई 60 फीट निर्धारित की थी और अब नोटिस 80 फीट के हिसाब से जारी कर दिए, साथ ही मास्टर प्लान की वैधता की भी दलील दी गई, जिसके चलते हाईकोर्ट ने निगम के नोटिसों को जहां शून्य घोषित किया था, साथ ही पुन: सुनवाई कर वैधानिक प्रक्रिया के तहत निर्णय लेने के आदेश दिए। चूंकि निगम इस मामले में अपने ही नोटिसों के खिलाफ कोई आदेश नहीं दे सकता था, इसलिए उसने अपने पुराने निर्णय को ही बरकरार रखा, जिसके चलते याचिकाकर्ताओं ने पुन: हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
प्राधिकरण की सारी टीपीएस योजनाएं भी हो सकती हैं प्रभावित
मास्टर प्लान के आधार पर ही जहां सभी विभाग अपनी योजनाएं बनाते हैं और नगर तथा ग्राम निवेश उसके मुताबिक ही अभिन्यास मंजूर करता है, जिसमें इंदौर विकास प्राधिकरण की योजनाएं भी शामिल हैं। नियम के मुताबिक, प्राधिकरण मास्टर प्लान के निवेश क्षेत्र में ही अपनी योजनाएं घोषित कर सकता है और लैंड पूलिंग एक्ट लागू होने के बाद प्राधिकरण ने टीपीएस योजनाएं घोषित की है, लेकिन अगर इंदौर का मास्टर प्लान 31 मार्च 2021 को ही समाप्त मान लिया जाता है तो ऐसे में प्राधिकरण की सभी टीपीएस योजनाओं को भी चुनौती मिलेगी और उसके आधार पर जो मास्टर प्लान की सड़कों का निर्माण प्राधिकरण द्वारा करवाया जा रहा है उस पर भी संकट खड़ा हो जाएगा, क्योंकि टीपीएस योजनाओं में शामिल मास्टर प्लान की सड़कें प्राधिकरण ही बना रहा है। इसके अलावा भी सड़कों, फ्लायओवरों सहित अन्य प्रोजेक्ट भी उसने शुरू कर रखे हैं।
तीन माह विलंब से दी हाईकोर्ट आदेश को चुनौती
नगर तथा ग्राम निवेश ने हाईकोर्ट के सिंगल आदेश को चुनौती देने की प्रक्रिया में लगभग तीन माह का विलंब कर दिया, जिसके चलते हाईकोर्ट में सड़क चौड़ाई के मामले में ढेरों याचिकाएं दायर हो गईं, जिसकी सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने भी पूछा कि जब मास्टर प्लान अस्तित्व में ही नहीं है तो फिर चौड़ाई कैसे तय की गई और अब इस मामले में अब 14 मई को सुनवाई होना है। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि शासन को इस मामले में गंभीरता से निर्णय लेते हुए फटाफट अपील दायर कर देना थी। मगर नगर तथा ग्राम निवेश इंदौर ने भोपाल संचालक को पत्र भेजा और वहां से फिर विधि विभाग से अनुमति मांगी गई, जिसमें तीन माह का समय निकल गया और अभी पिछले दिनों शासन आदेश प्राप्त करने के बाद नगर तथा ग्राम निवेश ने हाईकोर्ट के सिंगल बेंच आदेश को चुनौती देते हुए अपील प्रस्तुत की है, जिसकी पुष्टि संयुक्त संचालक सुभाशीष बनर्जी ने भी की है।
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