
जीआरपी लाइन में लिकेज सुधार के कारण पंप करना पड़े बंद, अब यशवंत सागर से चार टंकियों को और अधिक भरने की जुगाड़ भी
इंदौर। नर्मदा (Narmada) के अलावा नगर निगम (Municipal council) यशवंत सागर (Yashwant Sagar) से भी पानी (water) लेकर कई क्षेत्रों की टंकियों के जरिए जलापूर्ति करता है। अभी 6 टंकियां भरी जाती हैं, उसकी जगह 10 टंकियों को भरने की जुगाड़ की जा रही है। इसके लिए देवधरम फिल्टर स्टेशन स्थित ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता में इजाफा किया जाएगा। नर्मदा की तुलना में यशवंत सागर का पानी अत्यंत सस्ता भी पड़ता है। दूसरी तरफ अभी चल रहे जलसंकट के बीच जीआरपी लाइन में हुए लिकेज और सुधार कार्य के कारण आज सुबह भी 20 टंकियों से जलप्रदाय बाधित रहा।
अभी जलूद से इन्दौर तक नर्मदा के तीनों चरणों के जरिए लगभग 450 एमएलडी पानी शहर लाकर टंकियों के माध्यम से और सीधे जलप्रदाय कर बंटवाया जाता है, लेकिन जलूद से इन्दौर पानी लाने का खर्चा अधिक आता है और निगम बोरिंगों के अलावा यशवंत सागर से भी पानी लेकर बंटवाता है। अभी गर्मी के चलते पूरा शहर जलसंकट की गिरफ्त में है और 700 से अधिक टैंकर भी निगम को चलाना पड़ रहे हैं। लिहाजा वाटर रिचार्जिंग, वाटर रियूज सहित अन्य प्रोजेक्टों पर भी काम किया जा रहा है तो नर्मदा का चौथा चरण भी निगम ला रहा है। अन्य तालाबों के पानी का इस्तेमाल करने और यशवंत सागर के भी अधिक दोहन के प्रयास किए जा रहे हैं। कई साल पहले यशवंत सागर बांध की ऊंचाई बढ़ाकर इसकी क्षमता भी बढ़ाई गई थी और अब बारिश में यह 19 फीट से अधिक भर जाता है और गर्मियों तक निगम इसका पानी लेकर आधा दर्जन टंकियों और कुछ क्षेत्रों में सीधे जलप्रदाय भी करता है। अब प्रयास किए जा रहे हैं कि ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाकर शहर के पश्चिमी हिस्से में 6 के बजाए 10 टंकियों को यशवंत सागर के पानी से भरा जाए, जिसके प्रयास शुरू किए गए हैं। फिलहाल 50 एमएलडी से अधिक पानी लिया जाता है और अगर योजना सफल रही तो सुपर कॉॅरिडोर सहित उससे जुड़े क्षेत्रों को भी यशंवत सागर का पानी मिल सकता है, वहीं निगम के जलकार्य समिति प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू ने बताया कि जीआरपी लाइन लिकेज का सुधार कार्य भी पूरा हो गया है। कल डमी प्लेट को हटाने का कार्य किए जाने के चलते नर्मदा के पहले और दूसरे चरण के पंप बंद किए गए थे, जो रात को चालू हुए, लेकिन बिजलपुर स्थित नर्मदा कंट्रोल रूम तक प्रेशर रात एक बजे के बाद बना, जिसके चलते आज 20 टकियों से जलापूर्ति प्रभावित हुई और यह टंकियां कम क्षमता से भर सकीं। इनमें अन्नपूर्णा, छत्रीबाग, राजमोहल्ला, योजना 103, लोकमान्य नगर, द्रविड़ नगर, महाराणा प्रताप, नरवल, कुशवाह मोहल्ला, बाणगंगा, सुभाष चौक, सदर बाजार, जिंसी हाट मैदान, मल्हार आश्रम, गांधी हाल, भक्त प्रहलाद नगर, जयहिंद नगर एमओजी लाइन टंकियां शामिल रहीं, जो 1.10 मीटर से लेकर 3.60 मीटर तक ही भर सकीं। दूसरी तरफ कल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत लिम्बोदी तालाब और फिर वीरगढ़ी हनुमान प्रचाीन बावड़ी का भी अवलोकन किया और तालाब गहरीकरण, संरक्षण कार्य में श्रमदान भी किया। शहर में 10 से अधिक बड़े तालाबों और 250 से अधिक कुएं-बावडिय़ों के संरक्षण, पुनर्जीवन और जीर्णोद्धार काम शुरू किया गया है।