
इंदौर के आंदोलनकारी युवाओं का कलेक्टर ने दिल जीता
इंदौर। भंवरकुआं चौराहे (भंवरकुआं चौराहे ) को दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) की तरह आबाद कर देने वाले आंदोलन के नेतृत्वकर्ता छात्रों का कलेक्टर शिवम वर्मा (Collector Shivam Verma) ने दिल जीत लिया। इन छात्रों की मांगों को लेकर हुई बैठक में एक तरफ जहां उनकी बात मानी गई, वहीं दूसरी तरफ इनसे ऐसा संवाद किया गया कि विद्यार्थी भी गदगद हो गए।
कल दोपहर में कलेक्टर कार्यालय में कलेक्टर के कक्ष में अरुण बडोले और उनके 10 – 12 साथी अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर से मिलने के लिए गए थे। इस दौरान इन विद्यार्थियों के द्वारा हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को के सिलेंडर उपलब्ध कराने की समस्या को प्रमुखता के साथ रखा गया। विद्यार्थियों का कहना था कि गैस कनेक्शन नहीं होने की वजह से उन्हें 3000 में ब्लैक में सिलेंडर लेना पड़ता है। कलेक्टर ने तत्काल खाद्य विभाग के अधिकारियों को बुलवाकर निर्देश दिया कि इन विद्यार्थियों के पास जो किराएदारी का एग्रीमेंट है, उसके आधार पर इन्हें गैस कनेक्शन दिलवाया जाए। विद्यार्थियों द्वारा बस पास की राशि ऊपर 200 प्रतिमाह से बढ़ाकर रुपए 600 प्रतिमाह कर दिए जाने का विरोध किया गया तो कलेक्टर ने कहा कि सिटी बस की व्यवस्था में परिवर्तन हो गया है। अब जो प्रदेश स्तर की कमेटी बनी है, उसमें इस तरह की व्यवस्था संभव नहीं है। फिर भी मैं आपकी बात को उचित फोरम तक पहुंचा दूंगा। हॉस्टल और अन्य स्थान पर रहने वाले विद्यार्थियों को आने वाली समस्या के समाधान के लिए कलेक्टर द्वारा एक हेल्पलाइन नंबर दिया गया। इस हेल्पलाइन नंबर पर फोन लगाकर विद्यार्थी अपनी समस्याएं बता सकते हैं, जिसका की 24 घंटे के अंदर समाधान होगा। इस बैठक में जब विद्यार्थियों द्वारा अपनी स्कॉलरशिप की समस्या को सामने रखा गया तो कलेक्टर के द्वारा तत्काल राज्य सरकार के अधिकारियों से भोपाल चर्चा की गई। कलेक्टर ने कहा कि हम कोशिश करेंगे कि शासन के स्तर से इस समस्या का समाधान हो जाए। विद्यार्थियों द्वारा यह शिकायत भी की गई कि वे लोग जहां पर किराए से रहते हैं, वहां पर उनसे 12 से 15 रुपए प्रति यूनिट का बिजली बिल लिया जाता है। इस मामले में कलेक्टर द्वारा बिजली कंपनी के माध्यम से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
14 में से 8 इंजीनियरिंग के छात्र
इन विद्यार्थियों से उनकी समस्या पर पूरी चर्चा करने के बाद कलेक्टर द्वारा यह जानकारी ली गई कि कौन सा विद्यार्थी मूल रूप से कहां का रहने वाला है तथा कहां तक शिक्षित है। वहां चर्चा के लिए जो 14 विद्यार्थी आए थे, उनमें से आठ विद्यार्थी ऐसे थे, जिन्होंने इंजीनियरिंग की है। यह विद्यार्थी अब आगे की पढ़ाई के लिए लगे हुए हैं। कलेक्टर खुद भी मैकेनिकल इंजीनियर हैं, ऐसे में उन्होंने इंजीनियर विद्यार्थियों से उनके वर्तमान के कोर्स और शिक्षा के बारे में चर्चा की।
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