
इंदौर। नगर निगम ने स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए कमर कस ली है। पहले सिटीजन फीडबैक में जहां पीछे थे, वहीं अब पूरे देश में अव्वल आ गए, जिसके लिए सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाया और एनजीओ के साथ-साथ मीडिया इन्फ्लूएंसर की भी मदद ली गई। अब इस फीडबैक में साढ़े 5 लाख फीडबैक के साथ इंदौर सबसे आगे है। वहीं महापौर ने इंदौर को नम्बर वन बनाए रखने के लिए सभी 22 झोनों की कमान एमआईसी सदस्यों को भी सौंपी है, तो दूसरी तरफ आयुक्त ने सभी अफसरों को भी लगा रखा है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्वच्छता सर्वेक्षण-2026 में नंबर-1 बनाए रखने हेतु 22 जोनों की कमान एमआईसी सदस्यों को सौंपी है देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर ने स्वच्छता सर्वेक्षण-2026 में लगातार अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखने के लिए व्यापक रणनीति लागू कर दी है। पुष्यमित्र भार्गव ने शहर के सभी 22 जोनों की जिम्मेदारी नगर निगम के एमआईसी (मेयर-इन-काउंसिल) सदस्यों को सौंपते हुए स्वच्छता, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रतिदिन निगरानी के निर्देश दिए हैं।
महापौर ने स्पष्ट किया कि सर्वेक्षण पूर्ण होने तक प्रत्येक एमआईसी सदस्य अपने आवंटित जोनों का रोजाना दौरा करेगा, क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करेगा और स्वच्छता कार्यों की गुणवत्ता, नागरिक सुविधाओं तथा विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेगा। सभी सदस्यों को अपनी कार्रवाई का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर आगामी बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्रगति की नियमित समीक्षा की जा सके।
राजेंद्र राठौड़ – जोन 1 और 4ष्ट्व अश्विनी शुक्ला -जोन 2, 13 और 14, निरंजन सिंह चौहान -जोन 7, 8 और 15, राजेश उदावत – जोन 10 और 19, अभिषेक शर्मा बबलू – जोन 12 और 17, नंदकिशोर पहाड़िया – जोन 3, 9 और 16, प्रिया दांगी – जोन 5 और 6, मनीष शर्मा (मामा) – जोन 11, 18 और 21, राकेश जैन – जोन 20 और 22 की जिम्मेदारी सौंपी गई। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि स्वच्छता केवल नगर निगम का अभियान नहीं, बल्कि शहर की पहचान और नागरिकों के गौरव का प्रतीक है। एमआईसी सदस्यों की प्रत्यक्ष भागीदारी से प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी, विकास कार्यों में तेजी आएगी और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से नागरिकों तक पहुंचेगा ।लगातार स्वच्छता में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी रहे इंदौर ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि नंबर-1 की दौड़ में बने रहने के लिए वह तैयारी, प्रबंधन और जनभागीदारी तीनों मोर्चों पर पूरी ताकत से जुटा हुआ है।
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