
इंदौर। तमाम चेतावनियों के बावजूद लोग चोरी-छिपे हरे-भरे पेड़ (Lush green trees) काटने से बाज नहीं आ रहे हैं। कल निगम (Corporation) की टीम ने मिली सूचना के आधार पर मोरसली गली (Morsali Lane) में निर्माणाधीन मकान (House under construction) में काटे गए पीपल के पेड़ (Peepal Trees) को लेकर कड़ी कार्रवाई की। मौके से मशीनें जब्त कर ली गईं और संबंधितों पर अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना डेढ़ लाख रुपए लगाया।
नगर निगम उद्यान विभाग ने इससे पहले भी अवैध रूप से पेड़ काटने वालों के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की है और इसके लिए एक अलग टीम बनाई है, जो सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचती है। जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर के मुताबिक कल निगम की टीम को सूचना मिली कि मोरसली गली में कुछ लोग निर्माणाधीन मकान के हिस्से में वर्षों पुराने पीपल के पेड़ को काटने में लगे हैं। इस पर निगम की टीम मौके पर भेजी गई तो पता चला कि वहां पीपल के पेड़ का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह काट दिया गया था। टीम ने मशीनें और अन्य संसाधन जब्त कर लिए। इस मामले को लेकर निगम टीम ने अग्रवाल नामक व्यक्ति पर डेढ़ लाख का जुर्माना लगाया है। अब तक पेड़ काटने के मामले को लेकर यह सबसे बड़ा जुर्माना है। राठौर का कहना है कि कहीं भी शिकायत पर निगम द्वारा तत्काल कार्रवाई की जा रही है और बारिश के चलते मुख्य मार्गों से लेकर कई अन्य स्थानों पर खतरनाक पेड़ों की छंटाई भी निगम द्वारा की जा रही है, ताकि बारिश में तेज हवा-आंधी के दौरान कोई हादसा न हो।
35 लोगों पर पेड़ कटाई का 15 लाख जुर्माना ठोंका…दो साल से वसूल नहीं सका निगम
दो वर्ष पूर्व 2024-25 में निगम द्वारा 35 स्थानों पर पेड़ की कटाई करवाने वाले लोगों पर 15.25 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया, लेकिन आज तक यह राशि नगर निगम नहीं वसूल सका। शहर में बिना अनुमति के कहीं भी पेड़ की कटाई किए जाने की जानकारी मिलने पर नगर निगम की टीम द्वारा मौके पर जाकर पंचनामा बनाया जाता है और पेड़ कटवाने वाले व्यक्ति का चालान बनाकर उस पर जुर्माना लगाया जाता है। वर्ष 2024 और 2025 में निगम की टीम तो मौके पर गई, चालान बनाए और जुर्माना लगाकर आ गई। इस जुर्माने की राशि की वसूली नहीं की गई। यह जुर्माना अभी तक लंबित है। वैसे तो नियम यह है कि जब पेड़ की कटाई हो, तब निगम की टीम जाए और उसी समय चालान बनाने के साथ जुर्माने की राशि हाथोहाथ वसूल करे। पिछले 2 साल के जो 35 चालान लंबित पड़े हैं उनकी राशि वसूल करने के लिए नगर निगम के पास कोई योजना नहीं है। निगम द्वारा इस राशि की वसूली की दिशा में भी कोई काम नहीं किया जा रहा है। हैरत की बात तो यह है कि इससे कम शुल्क में निगम द्वारा बाकायदा पेड़ काटने की अनुमति दे दी जाती है, जबकि अनुमति नहीं लेने पर ज्यादा जुर्माना ठोंका जाता है।
विकास के कारण हो रही है खूब कटाई
इस समय विभिन्न विकास कार्यों के कारण शहर में पेड़ों की जमकर कटाई की जा रही है। इंदौर नगर निगम द्वारा मास्टर प्लान में प्रावधान की गई 23 सडक़ों का निर्माण किया जा रहा है। इन सडक़ों में से जिन सडक़ों का काम शुरू हो गया है वहां पर जो पेड़ सडक़ निर्माण में बाधक बन रहे थे उन्हें काट दिया गया है। इसके साथ ही मेट्रो रेल के काम में भी बाधक बन रहे पेड़ों की कटाई का अभियान चल रहा है। इस तरह विकास के लिए पेड़ों की कटाई के कारण शहर के पर्यावरण पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
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